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Zerodha Scam विवाद: ₹18 करोड़ निकासी न हो पाने पर निवेशक ने उठाया बड़ा आरोप

Zerodha Scam विवाद: ₹18 करोड़ निकासी न हो पाने पर निवेशक ने उठाया बड़ा आरोप Zerodha Scam विवाद: ₹18 करोड़ निकासी न हो पाने पर निवेशक ने उठाया बड़ा आरोप

मुंबई, 5 नवंबर 2025 – भारत की प्रमुख ऑनलाइन ब्रोकिंग कंपनी Zerodha Scam हाल ही में एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। मुंबई के जाने-माने निवेशक और IVF विशेषज्ञ डॉ. अनुरुद्ध मल्पानी ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि Zerodha ने उनके खाते से ₹42.92 करोड़ के कुल मूल्य में से ₹18.46 करोड़ के निकासी योग्य फंड्स को निकालने में बाधा डाली है। उन्होंने इस मामले को Zerodha Scam बताते हुए सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल कर दिया।

इस विवाद का मुख्य कारण Zerodha द्वारा लागू किया गया ₹5 करोड़ का दैनिक निकासी लिमिट है। डॉ. मल्पानी के अनुसार, वे अपने खाते से सिर्फ ₹5 करोड़ प्रति दिन निकाल सकते हैं, जबकि उनका खाता एक दिन में ₹18 करोड़ से अधिक की निकासी के लिए सक्षम था। उन्हें यह लिमिट “अन्यायपूर्ण” लगी और उन्होंने इसे Zerodha Scam करार दिया।

Zerodha Scam विवाद की शुरुआत और आरोप

डॉ. मल्पानी ने अपने Zerodha खाते की स्क्रीनशॉट्स साझा करते हुए बताया कि उनके खाते में कुल मूल्य ₹42,92,98,198.10 है, जिसमें से ₹24,46,44,888.30 मार्जिन के रूप में उपयोग हो रहा है और ₹18,46,53,309.84 निकासी के लिए उपलब्ध है। हालांकि, Zerodha ने उन्हें बताया कि उनके सिस्टम में ₹5 करोड़ प्रति दिन निकासी की सीमा लागू है।

Zerodha Scam विवाद: ₹18 करोड़ निकासी न हो पाने पर निवेशक ने उठाया बड़ा आरोप

डॉ. मल्पानी ने ट्विटर की तरह सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “The Zerodha scam! वे मुझे अपने खाते से मेरा खुद का पैसा निकालने नहीं देते, क्योंकि दैनिक निकासी सीमा ₹5 करोड़ है। वे मेरा पैसा मुफ्त में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अन्यायपूर्ण है।” उन्होंने Zerodha के को-फाउंडर और CEO नितिन कामथ को भी टैग कर इस शिकायत को सार्वजनिक किया।

Zerodha का जवाब और CEO नितिन कामथ की सफाई

Zerodha के CEO नितिन कामथ ने इस आरोप का तुरंत जवाब दिया और स्पष्ट किया कि डॉ. मल्पानी के निकासी अनुरोध को पहले ही प्रोसेस किया जा चुका है। नितिन कामथ ने कहा कि ₹5 करोड़ की दैनिक लिमिट एक सुरक्षा जांच है, जो सिस्टम की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने ट्वीट किया, “हमारे सिस्टम की सेफ्टी के लिए, सभी वित्तीय सेवाओं की तरह, जब कोई ग्राहक ₹5 करोड़ से अधिक की निकासी करना चाहता है, तो हम उनसे सपोर्ट टिकट बनाने को कहते हैं। यह धोखाधड़ी और गलत निकासी से बचाने का एक उपाय है।”

कामथ ने यह भी बताया कि एक बार फंड ट्रांसफर हो जाने के बाद उसके रिवर्सल की कोई संभावना नहीं होती, इसलिए यह लिमिट जरूरी है ताकि किसी भी गलती या खतरे को रोका जा सके।

Zerodha Scam विवाद: ₹18 करोड़ निकासी न हो पाने पर निवेशक ने उठाया बड़ा आरोप

वित्तीय विशेषज्ञों और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

कई वित्तीय विशेषज्ञ और टैक्स सलाहकारों ने Zerodha की इस नीति का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ₹5 करोड़ की निकासी सीमा किसी भी धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक सामान्य और आवश्यक सुरक्षा उपाय है।

अजय रोती, Tax Compaas के संस्थापक और CEO ने कहा, “यह कोई स्कैम नहीं है, बल्कि एक सुरक्षा उपाय है। मैं ऐसे ब्रोकर्स के साथ काम करना पसंद करूंगा जिनके पास इस तरह के नियंत्रण होते हैं, जो मेरी राशि के अचानक साफ़ हो जाने से बचाते हैं।” उन्होंने निवेशकों को सुझाव दिया कि वे अपनी लेन-देन योजना बनाएं और बड़े निकासी के लिए इन सुरक्षा नियमों को समझें।

Zerodha Scam विवाद से निकासी प्रक्रिया पर सवाल

यह विवाद यह सवाल उठा रहा है कि क्या ऑनलाइन ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़ी निकासियों के लिए अधिक पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। निवेशकों के लिए बड़ी रकम निकालना कभी-कभी अनिवार्य हो जाता है, और यह सुरक्षा जांच कभी-कभी उनकी व्यक्तिगत जरूरतों से मेल नहीं खाती हैं।

Zerodha Scam विवाद: ₹18 करोड़ निकासी न हो पाने पर निवेशक ने उठाया बड़ा आरोप

हालांकि, Zerodha ने यह स्पष्ट किया है कि यह लिमिट नए नियमों या कंपनी के अवरोध के कारण नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा के लिए सभी ब्रोकिंग संस्थानों में समान रूप से लागू होती है।

Zerodha Scam विवाद ने निवेशकों के बीच निकासी सुरक्षा और वित्तीय प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर महत्वपूर्ण चर्चा शुरु कर दी है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ₹5 करोड़ की निकासी सीमा एक सुरक्षा जांच है, न कि कंपनी का पैसा रोकने का तरीका।

Zerodha ने भी अपने सिस्टम में इन्हीं सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए बड़े निवेशकों की सुविधा के लिए सपोर्ट टिकट के माध्यम से निकासी की सुविधा दी है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी परिस्थितियों में कंपनी से संवाद बनाएं रखें और बड़ी राशि निकालने के लिए पहले से योजना बनाएं, जिससे उन्हें किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े। इस घटना से स्पष्ट होता है कि डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षा और उपयोगकर्ता सुविधा के बीच एक संतुलन बनाए रखना चाहिए, ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे और सिस्टम सुरक्षित भी रहे।

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