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ट्रंप की नई टैरिफ धमकी: भारतीय चावल निर्यात पर असर? अमेरिकी उपभोक्ता ही होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित!

ट्रंप की नई टैरिफ धमकी: भारतीय चावल निर्यात पर असर? अमेरिकी उपभोक्ता ही होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय चावल के आयात पर अतिरिक्त ट्रंप टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक व्यापारिक तनाव बढ़ गया है। सफेद सदन में किसानों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों पर सस्ते चावल के डंपिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप टैरिफ से भारतीय चावल निर्यात पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, बल्कि अमेरिकी बाजार में चावल की कीमतें बढ़ेंगी और उपभोक्ता ही इसका बोझ झेलेंगे।

भारतीय चावल निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका उनका चौथा सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन कुल निर्यात का मात्र 3 प्रतिशत हिस्सा ही वहां जाता है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव अजय भल्लोटिया ने स्पष्ट किया कि ट्रंप का बयान गैर-बासमती चावल पर केंद्रित लगता है, क्योंकि वियतनाम और थाईलैंड केवल गैर-बासमती ही निर्यात करते हैं। ट्रंप टैरिफ की धमकी के बावजूद भारत के पास वैश्विक बाजारों में विविधता है, जो इसे मजबूत बनाती है।

ट्रंप का बयान और ट्रंप टैरिफ का बैकग्राउंड

ट्रंप की नई टैरिफ धमकी: भारतीय चावल निर्यात पर असर? अमेरिकी उपभोक्ता ही होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित!

ट्रंप ने 8 दिसंबर 2025 को सफेद सदन में आयोजित एक कार्यक्रम में $12 अरब डॉलर के किसान राहत पैकेज की घोषणा करते हुए ट्रंप टैरिफ पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “वे डंपिंग नहीं कर सकते। मैंने सुना है कि भारत चावल डंप कर रहा है।” अमेरिकी किसान सस्ते आयात से परेशान हैं, खासकर दक्षिणी राज्यों में जहां चावल की कीमतें गिर रही हैं। इससे पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत ट्रंप टैरिफ लग चुका है, जो मूल 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत हो गया था।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि सब्सिडी वाले विदेशी चावल अमेरिकी उत्पादकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को देशों की सूची बनाने का निर्देश दिया गया। लेकिन भारतीय पक्ष का कहना है कि ट्रंप टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ता ही प्रभावित होंगे, क्योंकि बिरयानी जैसे व्यंजनों के लिए बासमती चावल का कोई विकल्प नहीं। गल्फ और दक्षिण एशियाई समुदायों में मांग बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान चुनावी राजनीति से प्रेरित है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारत को घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि ट्रंप टैरिफ अमेरिकी किसानों और उपभोक्ताओं को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। भारत- अमेरिका व्यापार वार्ता 10-11 दिसंबर को फिर शुरू हो रही है, लेकिन बड़ा समझौता मुश्किल लगता है।

भारतीय चावल निर्यात के आंकड़े: अमेरिका का छोटा हिस्सा

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को बासमती चावल निर्यात किया मूल्य $337.10 मिलियन का, जो 2,74,213 मीट्रिक टन था। गैर-बासमती चावल $54.64 मिलियन (61,342 मीट्रिक टन) का रहा, कुल मिलाकर $390 मिलियन (लगभग 3,510 करोड़ रुपये)। अमेरिका बासमती का चौथा सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन गैर-बासमती का 24वां। कुल वैश्विक चावल निर्यात का मात्र 3 प्रतिशत ही अमेरिका जाता है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। यूएसडीए के अनुसार, 2025-26 में 24 मिलियन टन निर्यात का अनुमान है, जो वैश्विक व्यापार का 40 प्रतिशत होगा। अपेडा के मुताबिक, FY25 में 20.1 मिलियन टन ($12.95 अरब) निर्यात हुआ, जिसमें 172 देश शामिल हैं। पश्चिम एशिया मुख्य बाजार है। ट्रंप टैरिफ के बावजूद निर्यात मजबूत रहा, क्योंकि लागत उपभोक्ताओं पर डाली गई।

प्रकारमूल्य (मिलियन $)मात्रा (मीट्रिक टन)अमेरिका में रैंक
बासमती337.102,74,2134वां
गैर-बासमती54.6461,34224वां
कुल390

यह तालिका दर्शाती है कि ट्रंप टैरिफ का असर सीमित रहेगा। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने कहा कि निर्यात विविधीकृत हैं।

बाजार प्रभाव: शेयरों में गिरावट लेकिन लंबी दौड़ मजबूत

ट्रंप की चेतावनी के बाद भारतीय चावल कंपनियों के शेयर लुढ़के। कोहिनूर फूड्स 10 प्रतिशत गिरा, एलटी फूड्स 7 प्रतिशत, केआरबीएल और जीआरएम ओवरसीज में तेज गिरावट। चमन लाल सेटिया एक्सपोर्ट्स 4.5 प्रतिशत नीचे रहा। लेकिन बाद में कुछ रिकवरी हुई। ट्रंप टैरिफ की आशंका से निवेशक सतर्क हो गए।

विशेषज्ञ कहते हैं कि उद्योग लचीला है। सतीश गोयल (एआईआरईए अध्यक्ष) ने कहा, “भारतीय निर्यातकों को कोई नुकसान नहीं।” देव गर्ग (आईआरईएफ उपाध्यक्ष) ने विविध बाजारों का हवाला दिया। अमेरिकी चावल बासमती का विकल्प नहीं, क्योंकि सुगंध, स्वाद और बनावट अलग है। मांग बिरयानी जैसे व्यंजनों से बढ़ रही है।

ट्रंप की नई टैरिफ धमकी: भारतीय चावल निर्यात पर असर? अमेरिकी उपभोक्ता ही होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित!

शेयर बाजार की अस्थिरता अल्पकालिक है। भारत सरकार के साथ मिलकर नए बाजार खोले जा रहे हैं। ट्रंप टैरिफ से पहले ही 53 प्रतिशत प्रभावी शुल्क है, फिर भी निर्यात स्थिर रहा। जीटीआरआई ने सलाह दी कि भारत को रियायत न दे।

विशेषज्ञ राय और भविष्य की राहत

एआईआरईए के अजय भल्लोटिया ने कहा कि ट्रंप टैरिफ बासमती पर लागू होगा या नहीं, यह देखना बाकी है। बासमती निर्यात गैर-बासमती से पांच गुना ज्यादा। आईआरईएफ ने बयान जारी कर कहा कि बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर जाएगा। सतीश गोयल ने जोर दिया कि कोई नुकसान नहीं।

देव गर्ग ने कहा, “भारत वैश्विक बाजारों में मजबूत है। सरकार के साथ नए बाजार खोल रहे हैं।” ट्रंप का बयान किसानों को खुश करने का प्रयास है। भारत की चावल उत्पादन रिकॉर्ड 151 मिलियन मीट्रिक टन रहेगा। निर्यात प्रतिस्पर्धी है।

भविष्य में ट्रंप टैरिफ वार्ता का विषय बनेगा। लेकिन भारत की स्थिति मजबूत है। विविध बाजार, गुणवत्ता और लागत लाभ से उद्योग सुरक्षित। अमेरिकी उपभोक्ता महंगे चावल खरीदेंगे, जो मुद्रास्फीति बढ़ाएगा। भारत को नए अवसर मिलेंगे।

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