नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर ग्रीनलैंड पर दावा किया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। डेनमार्क ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात की। उन्होंने डेनमार्क को कमजोर बताया। ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है। इसकी आबादी सिर्फ 57 हजार है। ज्यादातर लोग इनुइट हैं। ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है।
बर्फ की मोटी परत यहां ढकी हुई है। ट्रंप ने कहा कि रूस और चीन के जहाज ग्रीनलैंड के आसपास घूमते हैं। इसलिए अमेरिका को इसका नियंत्रण चाहिए। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने ट्रंप से धमकियां बंद करने को कहा। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। ग्रीनलैंड के लोग अपना भविष्य खुद तय करेंगे। ट्रंप ने पहले भी ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही थी। अब वे इसे हिस्सा बनाने की बात कर रहे हैं। यह विवाद फिर तेज हो गया।
ग्रीनलैंड का महत्व
ट्रंप ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हैं। यह द्वीप उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है। आर्कटिक में नई नौवहन मार्ग खुल रहे हैं। बर्फ पिघलने से खनिज संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं। ग्रीनलैंड में दुर्लभ मिट्टी के खनिज भरे पड़े हैं। ये तकनीक और हथियार बनाने के लिए जरूरी हैं। चीन इनका सबसे बड़ा उत्पादक है। अमेरिका इनसे स्वतंत्र होना चाहता है। ग्रीनलैंड के खनिज जस्ता, लोहा, तांबा और यूरेनियम से भरे हैं। ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क इसे संभाल नहीं सकता।

अमेरिका को ग्रीनलैंड की सैन्य जरूरत है। यहां मिसाइल ट्रैकिंग के लिए महत्वपूर्ण जगह है। रूस के साथ तनाव बढ़ रहा है। ग्रीनलैंड नाटो की रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप ने जेफ लैंड्री को विशेष दूत बनाया। वे ग्रीनलैंड के लिए अमेरिकी हित बढ़ाएंगे। डेनमार्क ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया। ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य अड्डा पहले से है। फिर भी ट्रंप पूरा नियंत्रण चाहते हैं। आर्कटिक में प्रतिस्पर्धा तेज है। ग्रीनलैंड का स्थान रणनीतिक है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया
डेनमार्क ने ट्रंप की बातों की निंदा की। प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसेन ने कहा कि अमेरिका को धमकी देना बंद करे। ग्रीनलैंड डेनिश साम्राज्य का हिस्सा है। ग्रीनलैंड को 1979 से स्वायत्त शासन मिला है। रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क संभालता है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि अब कल्पनाएं बंद हों। उन्होंने अमेरिकी नियंत्रण को फैंटेसी बताया। ग्रीनलैंड के लोग डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहते हैं। सर्वे में 84 प्रतिशत लोग स्वतंत्रता समर्थक हैं।
लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते। 85 प्रतिशत लोग अमेरिका के खिलाफ हैं। ग्रीनलैंड की जनता डेनिश कल्याण व्यवस्था पसंद करती है। अमेरिकी व्यवस्था कमजोर मानी जाती है। स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का अमेरिकी झंडे वाला नक्शा शेयर किया। उसमें लिखा था सोन। इससे विवाद और बढ़ा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने कहा कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क फैसला लें।

यूरोप ने डेनमार्क का साथ दिया। फ्रांस ने भी समर्थन किया। ग्रीनलैंड के नेता अमेरिकी दबाव से परेशान हैं। वे अपना भविष्य खुद चुनना चाहते हैं। स्वतंत्रता सभी पार्टियों का एजेंडा है। लेकिन समय पर मतभेद हैं। कुछ जल्द स्वतंत्रता चाहते हैं। कुछ धीरे-धीरे। ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने पर निर्भर है। डेनमार्क दो-तिहाई बजट देता है। स्वतंत्रता के बाद कल्याण कैसे चलेगा यह चिंता है। ट्रंप का दबाव इन मुद्दों को जटिल बना रहा है। ग्रीनलैंड के लोग शांतिपूर्ण जीवन चाहते हैं। वे बाहरी हस्तक्षेप नहीं चाहते।
ट्रंप ने वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद ग्रीनलैंड की बात की। वहां Maduro को पकड़ा गया। ट्रंप अब क्यूबा और ईरान पर नजर हैं। ग्रीनलैंड को इसी क्रम में देखा जा रहा है। डेनमार्क नाटो सदस्य है। अमेरिका का करीबी सहयोगी है। फिर भी तनाव बढ़ रहा है। ग्रीनलैंड में खनन परियोजनाएं रुकी हुई हैं। पर्यावरण की चिंता है। जलवायु परिवर्तन से बर्फ पिघल रही है। इससे भूस्खलन बढ़ रहे हैं। ग्रीनलैंड की संस्कृति इनुइट परंपराओं पर टिकी है।
शिकार और मछली महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप की योजना इन सबको प्रभावित कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल उठा है। डेनमार्क ने अमेरिकी जासूसी के आरोप लगाए। ग्रीनलैंड में प्रभाव अभियान चला। अमेरिका ने इसे नकारा। विवाद सुलझाने के लिए बातचीत जरूरी है। ग्रीनलैंड के लोग एकजुट हैं। वे ट्रंप की मांग ठुकरा रहे हैं। दुनिया ग्रीनलैंड पर नजर रखे हुए है। यह आर्कटिक का भविष्य तय करेगा। ट्रंप की नीति अमेरिकी हितों पर केंद्रित है। लेकिन सहयोगी देश नाराज हैं। ग्रीनलैंड स्वतंत्रता की राह पर है। बाहरी दबाव इसे रोक नहीं सकते। समय बताएगा कि क्या होता है।
Read More: जाना डोगन की चौंकाने वाली बात Claude Code ने एक घंटे में किया जो Google टीम ने सालभर में