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फेड मीटिंग से पहले सेंसेक्स में 600 अंकों की जोरदार गिरावट: निवेशक क्यों सतर्क?

फेड मीटिंग से पहले सेंसेक्स में 600 अंकों की जोरदार गिरावट: निवेशक क्यों सतर्क?

भारत में सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक है, जो देश की 30 सबसे बड़ी और सक्रिय कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को दर्शाता है। यह सूचकांक भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत का बैरोमीटर माना जाता है, जहां इसका उतार-चढ़ाव निवेशकों के मनोबल और वैश्विक घटनाओं को प्रतिबिंबित करता है। सेंसेक्स का नाम ‘सेंसिटिव इंडेक्स’ से पड़ा, जो 1986 में शुरू हुआ और आज 85,000 से ऊपर पहुंच चुका है।

सेंसेक्स की गणना फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन विधि से होती है, जिसमें चुनिंदा कंपनियों के शेयरों की उपलब्ध संख्या को आधार बनाया जाता है। इसमें रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे आईटी, बैंकिंग और एनर्जी का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारत में सेंसेक्स निवेशकों को बाजार की दिशा समझने में मदद करता है, खासकर नए निवेशकों के लिए जो निफ्टी के साथ इसे ट्रैक करते हैं।

सेंसेक्स का ऐतिहासिक सफर

सेंसेक्स की शुरुआत 1 अप्रैल 1979 को आधार वर्ष मानकर 100 अंकों पर हुई, लेकिन आधिकारिक लॉन्च 1986 में किया गया। 1990 में यह 1,000 का स्तर पार कर चुका था, जबकि 1992 के हरषद मेहता घोटाले के बाद गिरावट आई। 2006 में 10,000, 2007 में 20,000 और 2015 में 30,000 के पार पहुंचा, जो आर्थिक सुधारों का परिणाम था।

2021 में 60,000 और हाल ही में दिसंबर 2025 में 86,000 के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छू चुका है। सेंसेक्स ने वैश्विक मंदी, कोविड-19 जैसी चुनौतियों का सामना किया, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती से उबरता रहा। यह यात्रा निवेशकों को सिखाती है कि लंबी अवधि में बाजार ऊपर की ओर बढ़ता है।

भारत में सेंसेक्स ने कई माइलस्टोन रचे, जैसे 2024-25 में 71,000 से 86,000 तक की रेंज। दीपक मोहनी ने इसका नाम ‘सेंसेक्स’ सुझाया, जो आज वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

हालिया गिरावट: फेड मीटिंग का साया

8 दिसंबर 2025 को सेंसेक्स 316 अंक गिरकर 85,395 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 26,079 पर खिसका। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 9-10 दिसंबर की बैठक से पहले निवेशक सतर्क हो गए, क्योंकि ब्याज दरों पर फैसला बाजार को प्रभावित कर सकता है। एफआईआई ने लगातार सातवें दिन 439 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो वैल्यूएशन चिंताओं से प्रेरित था।

रुपया 90.11 तक कमजोर हुआ, कच्चा तेल 63.83 डॉलर प्रति बैरल पर चढ़ा, जिससे आयात बिल बढ़ने की आशंका हुई। इंडिया वीआईएक्स 2.11% उछलकर 10.53 पर पहुंचा, जो अनिश्चितता का संकेत है। सेंसेक्स में 0.37% की गिरावट के बावजूद, 26,000 का सपोर्ट लेवल बरकरार रहा।

सेक्टरों में प्रॉफिट बुकिंग से रियल्टी, मेटल और स्मॉलकैप सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। भारत में सेंसेक्स की यह गिरावट वैश्विक संकेतों से जुड़ी है, लेकिन घरेलू विकास मजबूत बने हुए हैं।

भविष्य की दिशा: अवसर और चुनौतियां

फेड मीटिंग के बाद यदि दर कटौती हुई, तो उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ सकता है, जो सेंसेक्स को 26,300-26,500 तक ले जा सकता है। हालांकि, यदि दरें अपरिवर्तित रहीं, तो और गिरावट संभव है, सपोर्ट 25,950 पर। एफआईआई आउटफ्लो रुकना और रुपये की स्थिरता जरूरी है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती, आरबीआई की नीतियां सेंसेक्स को सहारा देंगी। निवेशकों को डाइवर्सिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए, लंबी अवधि के लिए आईटी और बैंकिंग सेक्टर आकर्षक। भारत में सेंसेक्स भविष्य में 90,000 पार कर सकता है, यदि वैश्विक जोखिम कम हुए।

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