उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी, जिसके बाद उनकी बेटी इशिता सेंगर ने भावुक खुला पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। यह मामला आठ साल पुराना है, जहां पूर्व बीजेपी विधायक पर नाबालिग से बलात्कार का आरोप है, और अब अदालती फैसलों ने नया मोड़ ले लिया है। इशिता ने पत्र में परिवार की पीड़ा, धमकियों और संस्थानों पर भरोसे की बात कही, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
उन्नाव रेप केस की पूरी समयरेखा: 2017 से SC तक का सफर
उन्नाव रेप केस की शुरुआत 4 जून 2017 को हुई, जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने कुलदीप सिंह सेंगर पर नौकरी का लालच देकर बलात्कार का आरोप लगाया। पीड़िता ने बताया कि विधायक के आवास पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने राजनीतिक दबाव में FIR दर्ज नहीं की। मामला तूल पकड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया।

2018 में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जिसके लिए सेंगर को 10 साल की सजा हुई। 28 जुलाई 2019 को रायबरेली में पीड़िता की कार को ट्रक ने टक्कर मारी, जिसमें उसकी चाची-मौसी की मौत हो गई—यह साजिश सेंगर से जुड़ी बताई गई। दिसंबर 2019 में दिल्ली ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
हाल ही में 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहते सजा निलंबित कर 15 लाख के बॉन्ड पर जमानत दे दी, शर्त रखी कि सेंगर पीड़िता से 5 किमी दूर रहे। लेकिन CBI ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 29 दिसंबर 2025 को CJI सूर्या कांत की बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया, कहा कि ‘विशेष परिस्थितियां’ हैं क्योंकि सेंगर दूसरे केस में जेल में है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे ‘भयानक बच्ची रेप’ बताया और MLA की पोजीशन पर सख्त सजा का हवाला दिया। कोर्ट ने सेंगर को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा, अगली सुनवाई जनवरी के आखिर में।
कुलदीप सेंगर का बैकग्राउंड भी विवादास्पद रहा। 52 वर्षीय सेंगर ने 1996 में गांव का प्रधान पद जीता, फिर 2002 में BSP से विधायक बने। उन्नाव में उनका दबदबा था—अवैध खनन, सरकारी अधिकारियों पर दबाव और भाई अतुल द्वारा 2007 में ASP को गोली मारने का केस। हर दल में उनका प्रभाव था, लेकिन रेप केस ने सब तबाह कर दिया।
इशिता सेंगर का भावुक पत्र: ‘थक गई हूं, डर गई हूं, न्याय दो!’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ठीक बाद कुलदीप सेंगर की बेटी इशिता सेंगर ने ‘भारत गणराज्य के सम्माननीय अधिकारियों’ को संबोधित खुला पत्र लिखा। उन्होंने कहा, ‘मैं एक बेटी हूं जो थक चुकी है, डर गई है और धीरे-धीरे भरोसा खो रही है, लेकिन उम्मीद पर आखिरी दांव लगाए हुए हूं।’ इशिता ने आठ साल की चुप्पी का राज खोला—परिवार ने संस्थानों पर भरोसा कर विरोध नहीं किया।

‘हमने चुप्पी चुनी क्योंकि हम सत्ता में थे नहीं, बल्कि संस्थाओं पर यकीन था। सत्य को चीखने की जरूरत नहीं।’ उन्होंने ‘ताकतवर’ टैग पर सवाल उठाया, ‘कैसी ताकत है जो परिवार को八年 आवाजहीन रख दे?’ परिवार आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से टूट चुका, सोशल मीडिया पर रेप-मौत की धमकियां मिलीं। इशिता बोलीं, ‘मुझे रोज कहा जाता कि रेप हो, मार दी जाऊं, बस इसलिए कि मैं हूं।’
पत्र में उन्होंने चेतावनी दी कि दबाव और भीड़ का गुस्सा सबूतों पर भारी न पड़े। ‘सिम्पैथी या विशेष待遇 नहीं, इंसान होने के नाते न्याय चाहिए। कानून बिना डर के चले।’ इशिता डॉक्टर हैं, जबकि बड़ी बेटी ऐश्वर्या ने भी कहा, ‘हमारी इज्जत, शांति छीन ली गई।’ पीड़िता की मां ने SC फैसले का स्वागत किया, कहा न्याय की उम्मीद जगी।
कानूनी बहस और भविष्य: POCSO पर सवाल, न्याय की जंग जारी
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के स्टे को ‘असामान्य’ बताया क्योंकि सेंगर दोषी हैं और अलग केस में सजा काट रहे। बेंच ने चिंता जताई कि POCSO में ‘पब्लिक सर्वेंट’ से विधायकों को बाहर रखना खतरनाक हो सकता। CBI का तर्क—पीड़िता 15 साल 10 महीने की थी, सेंगर MLA थे, सख्त सजा जरूरी।
पीड़िता का परिवार CBI कार्यालय गया, प्रदर्शन कर रहा। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भायना ने कहा, पीड़िता के न्याय से समझौता न हो। सेंगर की बेटियों की गुहार ने बहस छेड़ दी—क्या दोषी के परिवार को धमकियां न्याय हैं?
यह केस न्याय व्यवस्था की परीक्षा है। जनवरी में अगली सुनवाई होगी, तब तय होगा कि उन्नाव की बेटी को इंसाफ मिलेगा या सेंगर परिवार को राहत। कुलदीप सेंगर केस ने दिखाया कि कानून सबके लिए बराबर, लेकिन दबाव में कमजोर न पड़े।
Read More: बिहार TRE-4: शिक्षक भर्ती की बहार, 5500 लाइब्रेरियन पदों पर भी लगेगी छापेमारी