24 नवंबर 2025 को दिल्ली के इंडिया गेट पर वायु प्रदूषण के खिलाफ एक प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन शाम को शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी दिल्ली की जहरीली हवा के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लेकिन अचानक कुछ प्रदर्शनकारियों ने नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के पोस्टर और नारे लगाने शुरू कर दिए। माडवी हिडमा हाल ही में आंध्र प्रदेश पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे।
इस घटना ने विवाद को जन्म दिया। प्रदर्शनकारी “कितने हिडमा मारोगे”, “हर घर से निकलेगा हिडमा” और “अमर रहे हिडमा” जैसे नारे लगा रहे थे। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने ट्रैफिक रोकने की कोशिश की। पुलिस टीम को हटाने पर कुछ लोगों ने पेपर स्प्रे भी किया। इसके बाद पुलिस ने 23 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज करवाई गई है।
पुलिस के अनुसार, दो थानों में FIR दर्ज हुई है। कर्तव्यपथ थाने में छह पुरुष प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हुए। इसके अलावा पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सभी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जा रहा है।

हिडमा के समर्थन में प्रदर्शन और राजनीतिक विवाद
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका मकसद केवल प्रदूषण के खिलाफ विरोध करना था। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हिडमा एक आदिवासी था जो अपने अधिकारों के लिए लड़ा. तरीके पर असहमति हो सकती है, लेकिन उसके संघर्ष को नकारा नहीं जा सकता।” यह बयान विवाद में और वृद्धि का कारण बना।
दिल्ली के विकास मंत्री कपिल मिश्रा ने पुलिस की कार्रवाई की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे विचारधारा के खिलाफ उचित जवाब है। उन्होंने प्रदर्शन में हिडमा के पोस्टरों को लेकर कहा कि यह “नक्सल विचारधारा को प्रदूषण आंदोलन के नाम पर आगे बढ़ाने की कोशिश है।”
इस प्रदर्शन का आयोजन दिल्ली कोऑर्डिनेशन कमेटी फॉर क्लीन एयर ने किया था। यह समूह सरकार की विकास नीतियों, जैसे जंगलों की कटाई और खनन, को प्रदूषण का मुख्य कारण मानता है। उनका कहना है कि ये नीतियां पर्यावरण और मौसम की चरम स्थिति को बढ़ावा देती हैं।
प्रदूषण का गंभीर संकट और प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
यह प्रदर्शन नवंबर 2025 का दूसरा बड़ा प्रदूषण विरोध प्रदर्शन था। 8 नवंबर को भी कई संगठनों और विपक्षी दलों ने इंडिया गेट की ओर मार्च किया था। तब दिल्ली का AQI (Air Quality Index) 400 से ऊपर था, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक है।
24 नवंबर को भी दिल्ली का AQI 397 दर्ज किया गया था, जो गंभीर स्तर के करीब है। 39 में से 20 मॉनिटरिंग स्टेशनों ने प्रदूषण को ‘सीवियर’ श्रेणी में बताया। यह प्रदूषण की तीव्रता और बढ़ते हुए राजनीतिक तनाव का संकेत है।
दिल्ली में प्रदूषण और नक्सलवादी मुद्दे दोनों संयुक्त रूप से सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं। इस प्रदर्शन और विवाद ने इसे और अधिक जटिल बना दिया है।
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