नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025: सर्वोच्च न्यायालय के 53वें चीफ जस्टिस के रूप में न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने शपथ ग्रहण की है। उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस बी.आर. गावई के पदत्याग के बाद यह जिम्मेदारी संभाली है। Justice Surya Kant को भारतीय न्याय व्यवस्था में उनकी गहरी समझ और न्याय देने के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्त्व में, सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण मामलों का तेजी से निपटारा और न्याय व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।
न्यायपालिका में Justice Surya Kant की यात्रा
Justice Surya Kant का जन्म हरियाणा में हुआ और उन्होंने न्याय के क्षेत्र में लंबा और समृद्ध करियर बनाया है। वर्ष 2004 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। बाद में, अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। 2019 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया।

इसके बाद 24 नवंबर 2025 को उन्होंने चीफ जस्टिस के रूप में पद संभाला। उनके कार्यकाल में न्याय व्यवस्था के कई पुराने मुकदमों को जल्द निपटाने और अदालतों की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का वादा है।
Justice Surya Kant की प्राथमिक रणनीति लंबित मामलों को कम करना और संविधान बेंच के गठन पर ध्यान केंद्रित करना है। उनका मानना है कि न्यायालयों में मध्यस्थता (मेडिएशन) एक प्रभावी और सरल उपाय हो सकता है, जो विवादों के समाधान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इससे न्याय प्रणाली में नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट को नई दिशा देने वाले Justice Surya Kant
Justice Surya Kant अपनी न्यायप्रियता और संवेदनशीलता के लिए लोकप्रिय हैं। उन्होंने कई मामलों में मानवीय दृष्टिकोण के साथ संविधान की रक्षा की है। उन्होंने मताधिकार, महिलाओं के अधिकारों, और गरीब वर्गों के कल्याण के मुद्दों पर बहुमूल्य निर्णय दिए हैं। अपने नए पद पर, वे न्यायिक सुधारों और प्रभावी सुनवाई प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए समर्पित हैं।
उनका उद्देश्य न्यायालय के सामने पड़े लंबित मामलों का समाधान करना है, जिसमें वर्तमान में लगभग 90,000 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं। उन्होंने कहा कि वे उन मामलों को विशेष ध्यान देंगे, जो निचली अदालतों में अटके हुए हैं और उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में लंबित शीर्ष मामलों से जुड़े हैं।
Justice Surya Kant की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के 5-सदस्यीय कॉलेजियम का पुनर्गठन किया गया है। इस समूह में वरिष्ठतम न्यायाधीशों के रूप में वे न्यायपालिका के महत्वपूर्ण फैसलों और न्यायाधीशों की नियुक्तियों का नेतृत्व करेंगे।
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