20 नवंबर 2025, गोवा – हर साल की तरह इस बार भी गोवा में 20 से 28 नवंबर तक आईएफएफआई 2025 यानी 56वां इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। इस फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य नए और उभरते फिल्मकारों को मौका देना है। इस बार आईएफएफआई 2025 में 81 देशों की 240 से अधिक फिल्में दिखाई जाएंगी। इसमें 13 वर्ल्ड प्रीमियर, 4 इंटरनेशनल प्रीमियर और 46 एशियन प्रीमियर शामिल होंगी।
इस वर्ष आईएफएफआई 2025 ने फिल्म प्रेमियों और फिल्मकारों के लिए कई नए अवसर खोल दिए हैं। इस बार रिकॉर्ड 2,314 फिल्में 127 देशों से आई हैं, जिससे आईएफएफआई 2025 की विश्व मंच पर खुद की पहचान और मजबूत हुई है।
उभरते फिल्मकारों के लिए सुनहरा मौका
आईएफएफआई 2025 में ‘बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ कंपटीशन आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसमें सात नए निर्देशक अपनी पहली फिल्म के साथ अपनी जगह बना रहे हैं। इन सात में पांच निर्देशक विदेशी हैं जबकि दो भारतीय हैं। यह प्रतियोगिता उन कहानियों की तलाश करती है जो नये और दिलचस्प नजरिये से समाज के रंगों को उजागर करें।

इस पुरस्कार के अंतर्गत सिल्वर पीकॉक ट्रॉफी, दस लाख रुपये नकद और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। इस बार जूरी की अध्यक्षता भारत के प्रसिद्ध फिल्मकार राकेश ओम प्रकाश मेहरा कर रहे हैं। उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के ग्रेम क्लिफोर्ड, जर्मनी की कैथरीना शुटलर, श्रीलंका के चंद्रन रुटनाम, और ब्रिटिश सिनेमैटोग्राफर रेमी अडेफारासिन शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों में इस बार एस्टोनिया के टोनिस पिल की फिल्म ‘फ्रैंक’ चर्चा में है, जिसमें अकेलापन और हिंसा के बाद दोस्ती की कहानी दिखाई गई है। स्पेन की निर्देशक गेमा ब्लास्को की ‘फ्यूरी’ (ला फ्यूरिया) और जर्मनी की क्रिस्टिना टूरनात्सेज़ की ‘कार्ला’ भी महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की नई परिभाषा पेश करती हैं। इसी तरह ईरान के हेसाम फरहमांद की ‘राहा’ और मेक्सिको की ‘द डेविल स्मोक्स’ भी नई कहानियों को उजागर करती हैं।
भारतीय फिल्मों का दम
आईएफएफआई 2025 में भारत की ओर से दो दमदार डेब्यू फिल्में चुनी गई हैं। पहली है त्रिबेनी राय की ‘शेप ऑफ मोमो’, जो सिक्किम की पृष्ठभूमि पर बनी है और नेपाली भाषा में है। इसमें एक युवती की घर की रूढ़ियों के खिलाफ विद्रोह की कहानी को खूबसूरती से चित्रित किया गया है। इस फिल्म को कांस, बुसान और सैन सेबेस्टियन जैसे बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में भी सराहा गया है।

दूसरी भारतीय फिल्म शिवराज वैचाल की मराठी फिल्म ‘आता थांबायचा नाय’ है। फिल्म मुंबई की सफाई कर्मचारियों की असली कहानी से प्रेरित है, जो पढ़ाई छोड़ने के बाद दोबारा अपनी शिक्षा शुरु करने का साहस दिखाते हैं। इस फिल्म में श्रम की गरिमा और जिंदगीभर सीखते रहने की प्रेरणा है।
इस साल आईएफएफआई 2025 ने साबित किया है कि भारत में सिनेमा का भविष्य उभरते फिल्मकारों के हाथ में सुरक्षित है।
आईएफएफआई 2025 का महत्व
आईएफएफआई 2025, दक्षिण एशिया का अकेला फिल्म फेस्टिवल है, जिसे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (FIAPF) की मान्यता प्राप्त है। यह फेस्टिवल हर साल गोवा में होता है और भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय, एनएफडीसी, और गोवा सरकार के सहयोग से आयोजित किया जाता है।

यही कारण है कि हर साल दुनिया भर के फिल्म निर्माता, कलाकार और दर्शक आईएफएफआई 2025 का इंतजार करते हैं। साल 1952 से चली आ रही इस फेस्टिवल की परंपरा को आईएफएफआई 2025 नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
आईएफएफआई 2025 ने यह अवसर बनाया है कि फिल्मों के जरिए दुनिया की विविधता देखी जाए और नई सोच वाले फिल्मकारों को पहचाना जाए। इन प्रयासों से साफ है कि आईएफएफआई 2025 भारतीय सिनेमा और नए प्रतिभाओं का गौरवपूर्ण मंच है।
इस तरह 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आईएफएफआई 2025 ने न सिर्फ उभरते फिल्मकारों को पहचान दिलाई है, बल्कि भारतीय सिनेमा और विश्व के सिनेमा प्रेमियों को भी जोड़ा है।
आईएफएफआई 2025 का मुख्य संदेश है – नई सोच, नई आवाज और नए सपनों की उड़ान।
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