दुबई, 2 दिसंबर 2025: दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट ट्रिब्यूनल ने नया आदेश दिया है। इस कारण यूजर फीस में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। फ्लाइट टिकट की कीमतें बहुत ऊंची चढ़ सकती हैं। यात्री परेशान हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा।
यह खबर बिजनेस टुडे ने दी है। ट्रिब्यूनल ने 2008-2014 के पुराने टैरिफ की गणना बदली है। एयरपोर्ट संचालकों को 50,000 करोड़ रुपये कम मिले थे। अब यात्री फीस बढ़ाकर यह राशि वसूलेंगे। फ्लाइट टिकट महंगी होने से यात्रा प्रभावित होगी। लाखों लोग इन एयरपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। सरकार चिंतित है।
विवाद की शुरुआत और कारण
एयरपोर्ट 2006 में निजी कंपनियों को सौंपे गए थे। दिल्ली का संचालन जीएमआर ग्रुप करता है। मुंबई का संचालन अडानी ग्रुप करता है। 2009 में एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनी। पुराने निवेश के आंकड़े सही नहीं थे। इसलिए हाइपोथेटिकल रेगुलेटरी एसेट बेस बनाया गया।

ट्रिब्यूनल ने पहले सिर्फ हवाई संपत्तियों को गिना। इसमें रनवे और टर्मिनल शामिल थे। एयरपोर्ट संचालकों ने विरोध किया। उन्होंने गैर-हवाई संपत्तियों को भी जोड़ने को कहा। इसमें ड्यूटी फ्री दुकानें आती हैं। पार्किंग और लाउंज भी शामिल हैं। 2011 में नागर विमानन मंत्रालय ने पत्र लिखा।
जुलाई में ट्रिब्यूनल ने फैसला उलट दिया। अब गैर-हवाई संपत्तियां भी गिनी जाएंगी। इस कारण 50,000 करोड़ का नुकसान हुआ। संचालक अब फीस बढ़ाएंगे। फ्लाइट टिकट की कीमतें प्रभावित होंगी। यात्री बोझ झेलेंगे। एयरलाइंस लागत ग्राहकों पर डालेंगी।
फीस में कितनी बढ़ोतरी संभव?
दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों की फीस 129 रुपये से 1,261 रुपये हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की फीस 650 से 6,356 रुपये तक पहुंचेगी। मुंबई में घरेलू फीस 175 से 3,856 रुपये हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय फीस 615 से 13,495 रुपये तक चढ़ सकती है। यह बढ़ोतरी 22 गुना तक है।
फ्लाइट टिकट अब महंगी हो जाएंगी। यात्री विकास फीस बढ़ेगी। लैंडिंग और पार्किंग शुल्क भी ऊंचा होगा। लाखों यात्री प्रभावित होंगे। ये भारत के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट हैं। बढ़ोतरी से यात्रा कम हो सकती है। सरकार ने चेतावनी दी है।
एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। घरेलू एयरलाइंस ने भी अपील की। लुफ्थांसा और एयर फ्रांस जैसी विदेशी कंपनियां शामिल हैं। गल्फ एयर ने भी विरोध किया। जस्टिस अरविंद कुमार सुनवाई करेंगे। जस्टिस निलय विपिनचंद्र अंजारिया भी बेंच में हैं। सुनवाई बुधवार को होगी।

ट्रिब्यूनल का आदेश लागू हो गया तो फ्लाइट टिकट की कीमतें आसमान छू लेंगी। यात्री पहले से ही चिंतित हैं। संसद में भी इस पर चर्चा हुई। विमानन मंत्रालय को घेरा गया। निजीकरण के बाद फीसें कई गुना बढ़ीं। अधिकारी कहते हैं यात्री नुकसान न झेलें। एयरपोर्ट एकाधिकार हैं। एयरलाइंस कोई चारा नहीं रखतीं।
फ्लाइट टिकट महंगी होने से पर्यटन प्रभावित होगा। व्यापार यात्राएं कम होंगी। मध्यम वर्ग पर बोझ पड़ेगा। सरकार बीच में आई है। वह यात्री हित बचाएगी। सुप्रीम कोर्ट फैसला लेगा। तब तक इंतजार करना पड़ेगा। यात्री सतर्क रहें। वैकल्पिक एयरपोर्ट चुनें।
फ्लाइट टिकट महंगी होने का खतरा और सुप्रीम कोर्ट में फैसले की उम्मीद
यह विवाद लंबा चल रहा है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने एरा का साथ दिया। अब ट्रिब्यूनल ने पलटा लिया। संचालक पुराना पत्र दिखाते हैं। मंत्रालय का 2011 का पत्र आधार है। गणना बदलने से राशि बढ़ी। अब वसूली यात्री करेंगे। फ्लाइट टिकट का हर टुकड़ा महंगा होगा।
सरकार अधिकारी परेशान हैं। वे कहते हैं अचानक बढ़ोतरी गलत है। यात्री विकास रोक सकती है। हाल के वर्षों में यात्रा बढ़ी है। अब ठहराव आ सकता है। उद्योग विशेषज्ञ चेताते हैं। फ्लाइट टिकट की ऊंची कीमतें हानि पहुंचाएंगी। एयरलाइंस लागत पास करेंगी। कोई बचाव नहीं बचेगा।

मुंबई एयरपोर्ट पहले भी फीस बढ़ा चुका। मई 2025 में बदलाव आया। दिल्ली ने भी कदम उठाया। लेकिन यह नया विवाद पुराना है। 2009-14 का हिसाब बिगड़ा। ट्रिब्यूनल ने सुधार किया। परिणाम डरावना है। फ्लाइट टिकट अब सस्ती नहीं रहेगी। यात्री सोचें।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण है। अगर ट्रिब्यूनल जीता तो फीसें चढ़ेंगी। एरा हारी तो राहत मिलेगी। एयरलाइंस राह देख रही हैं। यात्री समूह सक्रिय हैं। वे विरोध करेंगे। मीडिया कवरेज बढ़ा है। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी। रेडिट पर चर्चा हो रही।
यह मामला हवाई यात्रा बदल देगा। फ्लाइट टिकट की नई कीमतें तय होंगी। यात्री बजट बनाएं। सस्ते विकल्प ढूंढें। ट्रेन या बस सोचें। लेकिन एयरपोर्ट व्यस्त रहेंगे। समय की कमी में हवाई जहाज जरूरी है। बढ़ोतरी से असर पड़ेगा। सरकार हस्तक्षेप करे।
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