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BRICS डॉलर पर ट्रंप का सख्त प्रहार, वैश्विक आर्थिक युद्ध का नया मोड़

BRICS डॉलर पर ट्रंप का सख्त प्रहार, वैश्विक आर्थिक युद्ध का नया मोड़ BRICS डॉलर पर ट्रंप का सख्त प्रहार, वैश्विक आर्थिक युद्ध का नया मोड़

15 अक्टूबर 2025, न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने BRICS डॉलर को लेकर कड़ा हमला जारी रखा है। उन्होंने इस समूह पर आरोप लगाया है कि यह अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रभुसत्ता को खत्म करने की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी देश इस ग्रुप का हिस्सा है, उसपर अमेरिका टैरिफ लगाएगा। उनका कहना है कि इससे दुनिया के बड़े व्यापारिक समीकरण बदलेंगे और अमेरिका डॉलर की ताकत बनाए रखने के लिए दृढ़ है।

BRICS समूह पर अमेरिकी टैरिफ की चेतावनी

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अर्जेंटीना के प्रधानमंत्री जैवियर माइली के साथ बातचीत के दौरान साफ शब्दों में BRICS डॉलर को व्यापार और आर्थिक क्षेत्र में बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा, “जो कोई भी डॉलर में व्यापार करना चाहता है, उसे बढ़त मिलेगी। लेकिन जो BRICS में रहना चाहता है, उसे जरूर पता होना चाहिए कि हम उन देशों पर टैरिफ लगाएंगे।” ट्रंप ने विशेष रूप से भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि ये देश अमेरिका विरोधी नीति अपना रहे हैं।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी टैरिफ रणनीति के चलते कई देश BRICS से बाहर निकल रहे हैं और इस समूह की ताकत कमजोर हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “BRICS डॉलर पर हमला कर रहा था, इसलिए हमने उनके उत्पादों पर टैरिफ लगाया। अब वे चर्चा भी नहीं करते कि BRICS में वे रहना चाहते हैं।”

वैश्विक व्यापार में नए विवाद की संभावना

BRICS डॉलर के खिलाफ यह बयान वैश्विक व्यापार में एक बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS समूह पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी डॉलर के दबदबे को चुनौती दे रहा है। इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, यूएई, ईरान और इंडोनेशिया जैसे देश अब सम्मिलित हैं, जो मिलकर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

वर्तमान में, ट्रंप ने जो 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की चेतावनी दी है, वह इस समूह के विस्तार को रोकने का एक प्रयास है। अमेरिका चाहता है कि डॉलर और उसका वित्तीय प्रभुत्व बना रहे। ट्रंप ने कहा, “अगर डॉलर की वैश्विक भूमिका बराबरी पर नहीं रही तो यह किसी विश्व युद्ध हारने जैसा होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की अनुमति नहीं दी जाएगी ताकि डॉलर की ताकत बनी रहे।

भारत और BRICS डॉलर पर स्थिति

भारत ने इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। विदेश मंत्री स. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत का अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने का कोई इरादा नहीं है। भारत का रुख यह है कि वह डॉलर के महत्व को समझता है और किसी भी विवाद से बचना चाहता है। साथ ही, भारत BRICS के माध्यम से वैश्विक आर्थिक संतुलन में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

ट्रंप की रणनीति और वैश्विक प्रतिक्रिया

ट्रंप ने अपने ‘The Genius Act’ के माध्यम से अमेरिका की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की योजना भी बनाई है। वे लगातार टैरिफ का इस्तेमाल विदेशी नीतियों को प्रभावित करने के लिए कर रहे हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने इस कदम की आलोचना की है और इसे वैश्विक व्यापार के लिए खतरा बताया है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ की इस नीति से BRICS समूह और भी स्थिर और मजबूती की ओर बढ़ेगा। यह समूह अमेरिकी डॉलर के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए और ज्यादा सशक्त होगा। वैश्विक आर्थिक भूमिकाओं में बदलाव संभव है, जिससे अमेरिका और BRICS के बीच जमीन-जमीन पर टकराव और बढ़ सकता है।

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