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अयोध्या में सीएम योगी का दीपोत्सव: 500 साल के अंधकार पर विजय का प्रतीक दीप जलाया

अयोध्या में सीएम योगी का दीपोत्सव 500 साल के अंधकार पर विजय का प्रतीक दीप जलाया

19 अक्टूबर 2025 को अयोध्या में, भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने भव्य दीपोत्सव का उद्घाटन किया। इस अनोखे आयोजन में उन्होंने भगवान राम के जीवन एवं अयोध्या की खुशहाली का संदेश दिया। यह दीपोत्सव भारत के सांस्कृतिक इतिहास का प्रेरणादायक अध्याय बन गया है।

दीपोत्सव का ऐतिहासिक महत्व और सीएम योगी का योगदान

सीएम योगी ने दीपोत्सव के आस-पास के आयोजन का शुभारंभ किया। इस समारोह में उन्होंने कहा कि यह दीप 500 वर्षों के संघर्ष और आस्था की विजय का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह दीप हमारी आस्था का प्रतीक है, जो 500 साल पहले दीयों के रूप में जला था।

अयोध्या में सीएम योगी का दीपोत्सव: 500 साल के अंधकार पर विजय का प्रतीक दीप जलाया

सीएम योगी ने आगे कहा कि 2017 में जब पहली बार दिवाली के अवसर पर दीप जलाया गया था, उस समय पर्याप्त दीए उपलब्ध नहीं थे। तब केवल 51 हजार दीए कुंमारों ने बनाए थे। इस बार लाखों दीए जलाए गए हैं, जो इस संघर्ष और आस्था को दर्शाते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि यह दीपोत्सव भगवान राम के जीवनकाल और उनके मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान राम पहले तंबू में विराजमान थे, अब विशाल मंदिर में हैं। इस दीपोत्सव का उद्देश्य लोगों में धार्मिक विश्वास और सकारात्मकता भरना है।

भगवान राम और अयोध्या का समृद्ध इतिहास

सीएम योगी ने अयोध्या के बदलते स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब से राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू हुआ, तब से अयोध्या का इतिहास बदल रहा है। उन्होंने कहा कि अब अयोध्या पूरे देश और विश्व के सामने एक विरासत और संस्कृति का प्रतीक बन गई है।

सीएम योगी ने कहा कि पहले यहां गोलियां चली थीं, लेकिन अब यहां दीप जल रहे हैं। इस दीपोत्सव का उद्देश्य विषमता, अंधकार और संघर्ष के बीच प्रकाश और प्रेम का संचार करना है। उन्होंने कहा कि यह दीपोत्सव हर भारतीय के अंदर राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक है।

अयोध्या में इस साल का दीपोत्सव 26 लाख दीपकों के साथ मनाया जा रहा है। इस विशाल दीपोत्सव का दृश्य देखने के लिए लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं।

समारोह की विशेषताएं और आयोजन

इस दीपोत्सव में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूप का स्वागत किया गया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामकथा पार्क में भगवान राम और माता सीता के स्वरूप का माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने भगवान राम को सम्मानित किया।

दीप जलाने के लिए 56 घाटों पर 26 लाख दीपक जलाए गए हैं। इन दीपकों को तेल और बाती डालकर प्रज्ज्वलित किया गया। यह प्रकाश का महासागर बन गया है, जो अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

इसके अलावा, प्रभु राम के शुभ आगमन के लिए कई झांकियों और भव्य शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश और देश में दीपोत्सव की भव्यता का संदेश दे रहा है। राम कथा पार्क से प्रभु राम के तीनों स्वरूप हेलीकॉप्टर से उतरे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने राम कथा पार्क में भगवान राम के स्वरूप की पूजा की।

आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी व्यापक थी। अयोध्या की सरयू नदी के तट पर यह उत्सव आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री सीधे पहुंचें। उन्होंने राम की पैड़ी पर दीप जलाकर इस उत्सव का शुभारंभ किया।

सीएम योगी का कड़ा भाषण और समाज के प्रति संदेश

सीएम योगी ने अपने भाषण में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में पहले राम भक्तों पर गोली चलाने वाले लोग अब दीप जलाने का स्वांग रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले संघर्ष के कारण ही आज दीपोत्सव का महत्व बढ़ा है।

योगी ने कहा कि अयोध्या का इतिहास संघर्ष और आदर्श का संगम है। उन्होंने याद दिलाया कि जब उन्होंने 2017 में दीपोत्सव का आयोजन शुरू किया, तब बहुत कम दीपक जुट पाए थे। अब लाखों दीपक जल रहे हैं, जो इस धार्मिक विरासत का प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि यह दीपोत्सव केवल धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि संघर्ष और विजय का प्रतीक है। भगवान राम का नाम हर हृदय में बसता है। इस दीपोत्सव का उद्देश्य राष्ट्र में एकता, शांति और सद्भावना फैलाना है।

अंत में: दीपोत्सव का भाव और राष्ट्रीय संघटन

अयोध्या का दीपोत्सव विश्व में भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूत करता है। यह आयोजन हर साल अयोध्या की भव्यता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में यह उत्सव पूरे देश को एकता का संदेश देता है।

यह दीपोत्सव अपने आप में सनातन धर्म की विरासत का जश्न है। यह अंधकार पर प्रकाश और संघर्ष पर विजय का प्रतीक है। इसमें लाखों दीपकों का जलना वाकई में विश्व रिकॉर्ड बन सकता है।

इस वर्ष का दीपोत्सव इस बात का प्रतीक है कि हम अपने गुरुओं और पूर्वजों की परंपराओं को जीवित रख सकते हैं। यह आयोजन सभी को अपने संस्‍कृति, उनके संघर्ष और आस्था का सम्मान करने का अवसर प्रदान करता है।

यहां हर दीपक का प्रकाश पूरे भारत की आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह आयोजन अविस्मरणीय है, जो हम सभी को भगवान राम के आदर्शों की प्रेरणा देता है।

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