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मथुरा में 54 साल बाद खुला बांके बिहारी का खजाना: चांदी के बर्तन और रहस्य बने खाली संदूक

मथुरा में 54 साल बाद खुला बांके बिहारी का खजाना चांदी के बर्तन और रहस्य बने खाली संदूक

मथुरा, 19 अक्टूबर 2025: मथुरा में प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का खजाना करीब 54 साल बाद शनिवार को खोला गया। यह बांके बिहारी का खजाना कमरा 1971 से बंद था और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी के आदेश पर इसे खोला गया। इस अनोखे अवसर पर मंदिर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और सेवायतों की टीम ने चार घंटे तक बारीकी से तलाशी ली। 54 साल बाद खुला बांके बिहारी का खजाना स्थानीय लोगों और भक्तों के लिए चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।

खजाने के कमरे को खोलने की शुरुआत दोपहर करीब 1 बजे हुई और शाम 5 बजे तक यह प्रक्रिया चली। खजाना खोलने के लिए ग्राइंडर मशीन से जंग लगे ताले काटे गए। मंदिर के सेवायतों ने पूजा-अर्चना कर, दीप जलाकर इस समारोह को पवित्रता प्रदान किया। कमरे के अंदर धूल जमी हुई और फर्श पर पानी के छींटे भी दिखाई दिए। तलाशी में कई पीतल और कांसे के पुराने बर्तन, लकड़ी के बॉक्स, खाली संदूक और एक छोटा चांदी का छत्र मिला। हालांकि खुलासा हुआ कि कहीं सोना, चांदी या महंगे गहने नहीं थे। कुछ बक्सों में खाली डिब्बे पाए गए, जिनमें कभी आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं होती होंगी।

बांके बिहारी का खजाना: इतिहास और खुलने की प्रक्रिया

बांके बिहारी मंदिर का खजाना करीब साढ़े तीन घंटे बाद खोलकर जांच की गई। यह तोषखाना, यानी खजाना कक्ष, 160 साल पुराना बताया गया है। 1971 के बाद यह कमरा बंद कर दिया गया था, और उस समय मंदिर के जेवरात और चढ़ावे भारतीय स्टेट बैंक में रखे गए थे। सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में गठित हाई पावर कमेटी के आदेश से यह खजाना पुनः खुला।

मथुरा में 54 साल बाद खुला बांके बिहारी का खजाना: चांदी के बर्तन और रहस्य बने खाली संदूक

प्रक्रिया के दौरान दोबारा खोलने का फैसला लिया गया है, क्योंकि जांच अभी अधूरी है। अधिकारियों ने बताया कि कमरे में बरसों से बंद पड़े खजाने के कारण जंग लगी ताले कटवाना पड़ा। अंदर से कुछ सांपों के बच्चे भी निकले, जिन्हें वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया। इसके बाद ही तलाशी आगे बढ़ी।

मंदिर के परिसर में सुबह से ही लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। भक्तगण व स्थानीय जनमानस इस ऐतिहासिक घटना का जायजा लेने मंदिर पहुंचे। मंदिर के प्रमुख सेवायतों में से कुछ ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यह खजाना मंदिर की विरासत और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है, इसे प्रशासनिक आदेशों से खोलना अनुचित है।

विवाद और प्रतिक्रिया: बांके बिहारी का खजाना खुलने पर उठे सवाल

खजाना खोलने को लेकर गोस्वामी समाज ने विरोध जताया। समिति के शैलेन्द्र गोस्वामी ने कहा कि यह समिति भक्तों की सुविधा के लिए बनी थी, न कि खजाने को खोलने के लिए। उन्होंने इसे अधिकारों के दुरुपयोग के रूप में देखा है। मंदिर के अन्य सेवायत भी पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, जिससे संदेह बढ़ गया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लेकर भी बहस हो रही है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर के खजाने को प्रशासनिक लालच के लिए निशाना न बनाया जाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कम से कम मंदिरों के खजाने तो सुरक्षित रहने दें।

स्थिति में तनाव के बीच सभी वस्तुओं की सूची तैयार कर ली गई है। अधिकारियों ने कहा कि आगे की जरूरत पड़ने पर कोर्ट के आदेश से खजाना फिर से खोला जाएगा। मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में यह घटना धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

54 साल बाद खुला बांके बिहारी का खजाना एक ऐतिहासिक घटना है। हालांकि इसमें बड़े कीमती आभूषण नहीं मिले, लेकिन यह मंदिर की धार्मिक विरासत और धार्मिक विश्वासों से जुड़ा विषय बना हुआ है। भक्तगण और समाज दोनों ही इस मामले में पूरी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं ताकि श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत दोनों की रक्षा हो सके।

बांके बिहारी का खजाना खोलने की प्रक्रिया ने मथुरा में चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में उच्च प्रबंधन समिति की अगली बैठक में तय होगा कि आगे किस स्थिति में खजाने की दूसरी परत खोली जाएगी। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और इसके हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है।

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