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एक्टर श्रीनिवासन का निधन: मलयालम सिनेमा का एक युग समाप्त

एक्टर श्रीनिवासन का निधन: मलयालम सिनेमा का एक युग समाप्त

मलयालम सिनेमा के महान अभिनेता, पटकथा लेखक और निर्देशक श्रीनिवासन का 20 दिसंबर 2025 को कोच्चि के त्रिपुणिथुरा तालुक अस्पताल में निधन हो गया। 69 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली, जिससे केरल और पूरे सिनेमा जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया। लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे श्रीनिवासन अमृता अस्पताल जाते समय उनकी हालत बिगड़ गई, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

श्रीनिवासन के निधन और अंतिम विदाई की दर्दनाक कहानी

श्रीनिवासन का निधन सुबह 8:25 बजे हुआ। उनके पार्थिव शरीर को पहले एर्नाकुलम टाउन हॉल ले जाया गया, जहां दोपहर 1 से 3 बजे तक जनता ने अंतिम दर्शन किए। हजारों प्रशंसक, सहकर्मी और प्रशंसक भारी संख्या में पहुंचे। फिर शरीर को उदयम्पेरूर के कंदनाड स्थित उनके आवास ले जाया गया। 21 दिसंबर सुबह 10 बजे अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें उनके पुत्र विनीथ श्रीनिवासन ने मुखाग्नि दी। केरल पुलिस ने पूर्ण राज्य सम्मान के साथ गन सल्यूट और बगल सल्यूट दिया।

एक्टर श्रीनिवासन का निधन: मलयालम सिनेमा का एक युग समाप्त

मुख्यमंत्री पिनारayi विजयन, विपक्ष नेता वीडी सतीशन, सीपीआई नेता बिनॉय विश्वम और सीपीएम के एमवी गोविंदन जैसे प्रमुख नेता अंतिम संस्कार में उपस्थित हुए। मोहनलाल, मामूटी, प्रिथ्वीराज, कमल हासन और रजनीकांत जैसे सितारों ने सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि दी। मोहनलाल ने कहा, “श्रीनिवासन सर हमारी कहानियों का हिस्सा हमेशा रहेंगे।” प्रशंसकों ने सड़कों पर जुलूस निकाले, केरल भर में सिनेमा हॉल बंद रहे। यह न केवल एक अभिनेता का निधन था, बल्कि मध्यमवर्गीय केरल की आवाज का अंत था।

प्रारंभिक जीवन: गांव से चेन्नई तक का संघर्ष

6 अप्रैल 1956 को कन्नूर जिले के पत्यम गांव में जन्मे श्रीनिवासन का पूरा नाम श्रीनिवासन नारायणन नंबियार था। उनके पिता उन्नी स्कूल शिक्षक थे, जो कम्युनिस्ट विचारधारा के समर्थक थे, जबकि मां लक्ष्मी गृहिणी। एक बहन और दो भाइयों वाले इस सादा परिवार ने उन्हें कुथुपारंबा मिडिल स्कूल और कदिरूर गवर्नमेंट हाई स्कूल में पढ़ाया। अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद 1977 में चेन्नई के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ तमिलनाडु से प्रशिक्षण लिया।

गांव की सादगी और पिता की प्रगतिशील सोच ने उनकी रचनात्मकता को आकार दिया। उन्होंने कहा था, “असफलता ने मुझे सफलता से ज्यादा सिखाया।” शुरुआती दिनों में थिएटर और छोटे रोल्स से संघर्ष किया। 1976 में पी.ए. बकर की ‘मणिमuzhक्कम’ से डेब्यू किया, लेकिन ब्रेकआउट 1979 की ‘संगीतगोपालम’ से मिला। इन वर्षों ने उन्हें मलयालम सिनेमा की जड़ों से जोड़ा।

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सिनेमाई सफर: हास्य से व्यंग्य तक की यात्रा

श्रीनिवासन ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया, जहां वे कॉमेडियन से गंभीर पात्र तक सब निभा गए। 1980 के दशक में प्रियदर्शन, सथ्यान अंथिक्काड और कमल के साथ जुड़े। ‘नादोदिकट्टु’ (1987) में मोहनलाल के साथ ग्रामीण-शहरी टकराव का व्यंग्य क्लासिक बना। ‘वडक्कुनोकी यंत्रम’ (1989) का निर्देशन और लेखन खुद किया, जो मध्यमवर्गीय महत्वाकांक्षाओं पर तीखा प्रहार था।

1990 के दशक में ‘संदेशम’ (1991) ने राष्ट्रीय पटकथा पुरस्कार दिलाया, जहां परिवारिक राजनीति को हास्य से उकेरा। ‘मझयेथुम मुन्पे’ (1995), ‘अझकीया रावणन’ (1996), ‘ओरु मरावतूर कानावु’ (1998) जैसी फिल्में सुपरहिट रहीं। 2000 के बाद ‘उदयनानु थरम’ (2005), ‘कथा परयुम्पोल’ (2007) और ‘नजन प्रकाशन’ (2018) ने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़े। उन्होंने 10 फिल्में निर्देशित कीं, जिनमें ‘चिंताविस्टयाया श्यामला’ (1998) सामाजिक मुद्दों पर बनी। उनकी पटकथाएं आम आदमी की पीड़ा को हंसाते हुए दिखातीं।

प्रमुख फिल्में और अवॉर्ड्स: विरासत की नींव

श्रीनिवासन की फिल्मोग्राफी लंबी है। 1980s: ‘वरावेल्पु’ (1989), ‘थालयाना मंत्रम’ (1990)। 1990s: ‘मिधुनम’ (1993)। 2000s: ‘सेलुलॉइड’ (2013) में चेलंगाड गोपालकृष्णन का रोल। 2010s: ‘ट्रैफिक’ (2011), ‘डायमंड नेकलस’ (2012), ‘गुप्पी’ (2016), ‘अराविंदंते अथिधिकल’ (2018) उनकी 200वीं फिल्म। 2020s: ‘मोहन कुमार फंस’ (2021), ‘कीडम’ (2022), ‘कुरुक्कन’ (2023)।

अवॉर्ड्स में 1998 का नेशनल फिल्म अवॉर्ड ‘चिंताविस्टयाया श्यामला’ के लिए बेस्ट फिल्म ऑन अदर सोशल इश्यूज। केरल स्टेट अवॉर्ड्स: बेस्ट फिल्म ‘वडक्कुनोकी यंत्रम’ (1989), बेस्ट स्टोरी ‘संदेशम’ (1991)। दो फिल्मफेयर साउथ, छह केरल स्टेट, रामू करियट मेमोरियल (बेस्ट फिल्म और एक्टर), सथ्यान मेमोरियल (2009), टीके रामकृष्णन मेमोरियल (2011), भारत बालन के नायर अवॉर्ड (2012), तपस्या मदंबू स्मृति (2024)।

एक्टर श्रीनिवासन का निधन: मलयालम सिनेमा का एक युग समाप्त
फिल्मवर्षभूमिका/योगदानअवॉर्ड
नादोदिकट्टु1987ग्रामीण पात्रक्लासिक हिट
संदेशम1991पटकथानेशनल अवॉर्ड
चिंताविस्टयाया श्यामला1998निर्देशकनेशनल बेस्ट फिल्म
नजन प्रकाशन2018अभिनेता/लेखकहाईएस्ट ग्रॉसिंग

सामाजिक प्रभाव और निजी जीवन

श्रीनिवासन की फिल्में सामाजिक व्यंग्य की मिसाल हैं। वे राजनीति, परिवार, महत्वाकांक्षा पर तंज कसते। ‘उदयनानु थरम’ में सिनेमा उद्योग का मजा लिया। उन्होंने प्रोडक्शन भी किया। पत्नी विमला, पुत्र विनीथ (अभिनेता, ‘थामारा’ फेम) और ध्यन श्रीनिवासन (अभिनेता) परिवार। 2022 में हृदय सर्जरी हुई, फिर किडनी समस्या बढ़ी।

उनकी विरासत बेटों में जारी। प्रशंसक उन्हें ‘कॉमन मैन का चेहरा’ कहते। केरल सरकार ने डायलिसिस खर्च वहन किया। उनकी कहानियां आज भी प्रासंगिक, जैसे ‘नजन प्रकाशन’ में महत्वाकांक्षी युवा।

मोहनलाल: “हमारी स्क्रिप्ट्स कभी अधरूरी नहीं रहेंगी।” मामूटी: “व्यंग्य का जादूगर चला गया।” प्रिथ्वीराज अंतिम संस्कार में पहुंचे। कमल हासन: “मलयालम का गौरव।” रजनीकांत ने ट्वीट किया। उद्योग बंद रहा, विशेष प्रार्थनाएं हुईं। श्रीनिवासन ने पांच दशकों में मलयालम को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी हंसी, संवाद अमर रहेंगे। केरल ने एक सितारे को अलविदा कहा, लेकिन उनकी फिल्में नई पीढ़ी को प्रेरित करेंगी।

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