Saurabh Dwivedi, हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के चेहरे और लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक ने इंडिया टुडे ग्रुप से इस्तीफा दे दिया है। 12 साल की इस यात्रा के बाद वह नया प्लेटफॉर्म बनाने की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि Kuldeep Mishra लल्लनटॉप की संपादकीय कमान संभालेंगे।
Saurabh Dwivedi की शानदार पत्रकारीय यात्रा
Saurabh Dwivedi ने 2007 में आज तक में कॉपी एडिटर के रूप में करियर शुरू किया, फिर स्टार न्यूज, नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर जैसे संगठनों में काम किया। 2013 में इंडिया टुडे ग्रुप में फीचर्स एडिटर के तौर पर शामिल होकर 2016 में लल्लनटॉप की नींव रखी, जो युवा हिंदी दर्शकों के बीच क्रांति लेकर आई।
उनकी अगुवाई में लल्लनटॉप ने 35 मिलियन से ज्यादा यूट्यूब सब्सक्राइबर्स हासिल किए और पिछले महीने 250 मिलियन व्यूज रिकॉर्ड किए। प्लेटफॉर्म ने लॉन्ग-फॉर्म इंटरव्यू, पॉलिटिकल किस्से और महामहिम जैसे शो के जरिए गंभीर पत्रकारिता को मनोरंजक बनाया, खासकर हिंदी हार्टलैंड में।
Dwivedi ने X पर अलविदा पोस्ट में कहा, “धन्यवाद @TheLallantop ने पहचान, सबक और हिम्मत दी। अब विराम लेकर आगे का संकल्प बताऊंगा।” यह फैसला उनके आखिरी शो के ठीक बाद आया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार की आलोचना की।
Kuldeep Mishra की नई जिम्मेदारी और लल्लनटॉप का भविष्य
Kuldeep Mishra, लल्लनटॉप के फाउंडिंग मेंबर और LT शो व नेटानगरी के एंकर अब संपादकीय प्रमुख बनेंगे, जबकि Rajat Sain प्रोडक्शन टीम हेड। Mishra के पास 14 साल का अनुभव है, जिसमें BBC और इंडिया टुडे शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से ताल्लुक रखने वाले Mishra अपनी गहन पॉडकास्ट और इंटेंस स्टाइल के लिए मशहूर हैं।
यह “होमग्रोन जेनरेशनल शिफ्ट” लल्लनटॉप को नई ऊर्जा देगा, जैसा इंडिया टुडे ग्रुप वाइस चेयरपर्सन Kalli Purie ने कहा।
लल्लनटॉप की विरासत बरकरार रहेगी, जो सरल भाषा में खबरें पेश कर युवाओं को जोड़ती है। Mishra-Sain की जोड़ी प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाएगी।

पत्रकारिता में नया अध्याय: क्या इंतजार करें?
Dwivedi का जाना हिंदी डिजिटल मीडिया में बड़ा बदलाव है, क्योंकि उन्होंने टीवी की चीख-पुकार से हटकर बातचीत वाली पत्रकारिता को लोकप्रिय बनाया। सोशल मीडिया पर राजदीप सरदेसाई जैसे दिग्गजों ने उनकी तारीफ की।
12 साल में लल्लनटॉप ने चुनाव कवरेज और वैकल्पिक न्यूज स्पेस बनाया, लेकिन कुछ आलोचक इसे सिस्टम-फ्रेंडली बने होने का आरोप लगाते हैं। Mishra के नेतृत्व में क्या तेज धार बरकरार रहेगी?
Dwivedi का नया प्लेटफॉर्म हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दे सकता है। दर्शक बेसबिरादरी उनकी अगली पारी का इंतजार कर रही है। कुल मिलाकर, यह विदाई नहीं बल्कि नई शुरुआत है।
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