रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों ने मंगलवार को 2024 के जून के बाद का सबसे बुरा दिन देखा, जब ये 4.5% से अधिक गिर गए। रिटेल सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ट्रेंट के कमजोर प्रदर्शन की चिंताओं ने निवेशकों को डरा दिया, जिससे कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गया। यह गिरावट निफ्टी और सेंसेक्स को भी नीचे खींच ले गई, जहां रिलायंस का वेटिंग दूसरे नंबर पर है।
रिटेल बिजनेस पर बढ़ते खतरे
रिलायंस का रिटेल कारोबार कंपनी की वैल्यूएशन का करीब आधा हिस्सा है, जिसकी कीमत अक्टूबर में ICICI सिक्योरिटीज ने 103 अरब डॉलर आंकी थी। लेकिन सोमवार को ट्रेंट लिमिटेड ने दिसंबर क्वार्टर में स्टोर स्पेस प्रति वर्ग फुट रेवेन्यू में 15% की गिरावट की रिपोर्ट दी, जो रिटेल सेक्टर की मुश्किलों को दर्शाती है। सिटीग्रुप ने चेतावनी दी कि तेज फैशन प्रतिस्पर्धा मौजूदा खिलाड़ियों की मार्केट शेयर चबा रही है, और रिलायंस जैसे दिग्गज भी प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रेंट का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 17% बढ़कर 5,220 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन प्रति स्क्वायर फुट रेवेन्यू में गिरावट ने निवेशकों को निराश किया। रिलायंस रिटेल ने 2024-25 में 2,659 नए स्टोर खोले, कुल 19,340 स्टोर हो गए और कस्टमर बेस 349 मिलियन पार कर गया। फिर भी, किराया बढ़ोतरी, ट्रेंड मैनपावर की कमी और कंज्यूमर डिमांड में सुस्ती चुनौतियां बनी हुई हैं। AJIO और प्रीमियम ब्रांड्स पर फोकस के बावजूद, फैशन सेगमेंट में ‘डिजाइन-टू-शेल्फ’ साइकल को 30 दिनों में लाना मुश्किल साबित हो रहा है।
CLSA ने रिलायंस को अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से हटा दिया और एवरीट और डीमार्ट जोड़ दिए, जो कंजम्पशन स्टॉक्स पर शिफ्ट दिखाता है। अमेरिकी टैरिफ चिंताएं और रूसी ऑयल सप्लाई पर अनिश्चितता ने भी शेयरों पर दबाव डाला। रिलायंस ने ब्लूमबर्ग की रूसी क्रूड रिपोर्ट को ‘झूठा’ बताकर खारिज किया, कहा कि जनवरी में कोई डिलीवरी नहीं।
अन्य कारकों ने बढ़ाई चिंता
शेयरों में बिकवाली हालिया रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग से भी हुई। 2025 में रिलायंस शेयर 29% चढ़े, जो निफ्टी के 11% से बेहतर था। एनर्जी बिजनेस में रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने और चीन की एंटी-इनवोल्यूशन पॉलिसी से फायदा हुआ। लेकिन अब US टैरिफ वार्निंग और कंजमर डिमांड रिकवरी में रुकावट ने मूड खराब किया।
रिफाइनिंग में रूसी क्रूड पर निर्भरता खतरे में है। अगर भारत रूसी ऑयल बंद करता है, तो रिलायंस और सरकारी रिफाइनर्स प्रभावित होंगे। BPCL और HPCL शेयर 2% गिरे। मार्केट कैप 20.6 लाख करोड़ पर पहुंचा, लेकिन P/E रेशियो 23 गुना है, जो 5 साल के औसत से ऊपर।
भविष्य की संभावनाएं और रिकवरी

मॉर्गन स्टेनली 2026 में ग्रोथ कैटेलिस्ट देखता है: Jio IPO, टेलीकॉम रेट बढ़ोतरी, रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी। मोटिलाल ओसवाल का टारगेट 1,765 रुपये, UBS का 1,820 रुपये। न्यू एनर्जी में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग स्केल और इकोसिस्टम मजबूत।
डेवन चोकसी ने 2026 के लिए 50-60% अपसाइड की भविष्यवाणी की। रिटेल में AI, डेटा एनालिटिक्स से पर्सनलाइजेशन और tier-2/3 शहरों में विस्तार से ग्रोथ। रिलायंस रिटेल IPO 2028 तक संभव। लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए यह डिप खरीदारी का मौका हो सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म रिस्क बरकरार।
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