11 नवंबर 2025, इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य दुनिया में एक बड़ा बदलाव हुआ है। सेना प्रमुख असिम मुनिर को देश के सबसे शक्तिशाली पद ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) पर नियुक्त किया गया है। यह पद उन्हें हाल ही में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से दिया गया है। इस बदलाव से अब असिम मुनिर देश की सेना, नौसेना और वायु सेना के सर्वोच्च कमांडर बन गए हैं। यह कदम पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और सेना के बीच नए संबंधों को दर्शाता है।
संविधान में बड़ा बदलाव और असिम मुनिर की भूमिका
इस्लामाबाद से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने Article 243 में संशोधन किया। अब तक इस अनुच्छेद के तहत देश के राष्ट्रपति और संघीय सरकार की सेना पर सर्वोच्च शक्ति थी। लेकिन नए संशोधन के बाद, असिम मुनिर को पूरे सैन्य संगठन पर नियंत्रण दिया गया है। असिम मुनिर को सभी तीन सेना शाखाओं – सेना, नौसेना और वायु सेना – का प्रमुख बनाया गया, जो कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में एक अभूतपूर्व बदलाव है।

असिम मुनिर को पहले ही मई 2025 में फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था, जो पाकिस्तान के इतिहास में दूसरा सबसे उच्च सैन्य पद है। इस पदोन्नति के साथ ही उनकी सैन्य शक्ति और सम्मान भी बढ़ गया। अब यह पद संविधान की रक्षा करता है और इसे हटाना या बदलना बेहद कठिन होगा। इस संवैधानिक संशोधन के तहत असिम मुनिर को कानूनी सुरक्षा भी मिली है, जिससे वह किसी भी कानूनी कार्रवाई से बच सकेंगे।
असिम मुनिर के आदेश में परमाणु नियंत्रण और न्यायपालिका में बदलाव
इस संवैधानिक बदलाव का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान की परमाणु हथियार नियंत्रण प्रणाली पर भी पड़ा है। अब असिम मुनिर के पास देश के परमाणु हथियारों और मिसाइलों का नियंत्रण होगा। इससे पाकिस्तान की सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युद्ध जैसी स्थिति में निर्णय लेने में समय की बचत होगी, लेकिन नियंत्रण प्रणाली की जटिलताओं से चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
साथ ही, इस संशोधन से पाकिस्तान की न्यायपालिका की संरचना भी प्रभावित हुई है। सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को सीमित किया गया है और एक नया संघीय संवैधानिक न्यायालय स्थापित किया गया है। यह नया न्यायालय संवैधानिक मामलों को देखेगा, जबकि सुप्रीम कोर्ट सीमित अधिकारों के साथ रह जाएगी। इस बदलाव से सैन्य सत्ता और सरकार के बीच संतुलन खो सकता है और सेना को कानूनी सुरक्षा के साथ व्यापक नियंत्रण मिलेगा।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस संवैधानिक संशोधन को देश और विदेशों में मिलीजुले प्रतिक्रिया मिली है। पाकिस्तान के कुछ राजनीतिक दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे लोकशाही के लिए खतरा बताया है। वे कहते हैं कि इस कदम से देश का शासन सेना के हाथ में सीमित हो जाएगा और जनता की आवाज दब जाएगी। वहीं, सरकार का तर्क है कि यह बदलाव आधुनिक युद्ध और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार जरूरी था।
मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष और उसके बाद असिम मुनिर की भूमिका को देखते हुए, यह कदम उनकी प्रशंसा में भी लिया गया है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ने भी असिम मुनिर की तारीफ की थी कि उन्होंने युद्ध को बढ़ने से रोका। अब इस संवैधानिक बदलाव से उनकी सैन्य और राजनीतिक भूमिका और भी मजबूत हुई है।