बेंगलुरु, 7 दिसंबर 2025। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के अंतिम वर्ष के छात्र मनहर बंसल को Rhodes Scholarship 2026 मिली है। यह खबर पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। मनहर पंजाब के मुक्तसर जिले से हैं। वे बीए एलएलबी (ऑनर्स) कर रहे हैं। Rhodes Scholarship दुनिया की सबसे पुरानी और सम्मानित स्कॉलरशिप है। यह 1903 से चल रही है।
मनहर छह भारतीय छात्रों में शामिल हैं। वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाएंगे। वहां वे पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई करेंगे। यह उपलब्धि एनएलएसआईयू के लिए गर्व की बात है। अब तक 26 छात्रों को यह मिल चुकी है। मनहर का चयन कठिन प्रक्रिया से हुआ। वे दर्शनशास्त्र और साहित्य में रुचि रखते हैं। उनकी लेखनी कई जगह प्रकाशित हो चुकी है।
सोसाइटी फॉर ह्यूमनिस्टिक एंथ्रोपोलॉजी ने उन्हें सम्मान दिया। साउथ एशियन स्टडीज एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने भी सराहा। एनएलएसआईयू में वे छात्र पत्रिका के चीफ एडिटर रहे। उन्होंने थ्योरी रीडिंग ग्रुप चलाया। एकेडमिक सपोर्ट प्रोग्राम का नेतृत्व किया। मनहर फ्रेंच भाषा सीख रहे हैं। वे न्यूजलेटर लिखते हैं। डांस और स्विमिंग पसंद करते हैं। वे मानवतावादी शिक्षा को युवाओं तक पहुंचाना चाहते हैं।

Rhodes Scholarship उन्हें यह मौका देगी। ऑक्सफोर्ड में वे एमएसटी इन कम्पैरेटिव लिटरेचर एंड क्रिटिकल ट्रांसलेशन करेंगे। अक्टूबर 2026 में वे वहां पहुंचेंगे। दुनिया भर के 100 से ज्यादा छात्र उनके साथ होंगे। मनहर ने कहा कि यह स्कॉलरशिप शानदार अवसर है। एनएलएसआईयू ने उन्हें अंतरविषयी पढ़ाई दी। कानून के साथ सामाजिक विज्ञान और मानविकी सीखी। उन्होंने कई शिक्षकों का धन्यवाद किया। डॉ. अत्रयी मजुमदार, डॉ. सुधीर कृष्णास्वामी और डॉ. सम्यक घोष का नाम लिया। स्कूल टीचर स्वाति वर्मा और फ्रेंच टीचर विभा जीके को याद किया। अन्य फैकल्टी को भी धन्यवाद दिया।
मनहर बंसल की शैक्षणिक यात्रा
मनहर बंसल ने अपनी पढ़ाई मुक्तसर से शुरू की। फिर वे एनएलएसआईयू बेंगलुरु आए। यहां उन्होंने बीए एलएलबी (ऑनर्स) चुना। दर्शनशास्त्र और साहित्य पर फोकस किया। उनका काम मानव स्व को समझने पर है। यह सामाजिक-ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ा है। मनहर की रचनाएं कई जगह छपीं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। एनएलएसआईयू में वे सक्रिय रहे। छात्र पत्रिका को संपादित किया। थ्योरी रीडिंग ग्रुप बनाया। एकेडमिक सपोर्ट प्रोग्राम चलाया। ये काम उनके नेतृत्व को दिखाते हैं। मनहर सार्वजनिक एकेडमिक करियर चाहते हैं। युवाओं को मानवतावादी शिक्षा देंगे।
Rhodes Scholarship इस सपने को पूरा करेगी। वे ऑक्सफोर्ड में साहित्य और अनुवाद पढ़ेंगे। फ्रेंच सीखना उनकी मदद करेगा। न्यूजलेटर से वे विचार साझा करते हैं। डांस और स्विमिंग से तनाव कम करते हैं। मनहर का चयन साबित करता है कि मेहनत रंग लाती है। एनएलएसआईयू ने 25 अन्य छात्र दिए। अब मनहर 26वें हैं। यह संस्थान का गौरव बढ़ाता है। पिछले साल विभा स्वामीनाथन को मिली थी। Rhodes Scholarship भारत में 1947 से शुरू हुई।
हर साल पांच छात्र चुने जाते थे। इस बार छह हुए। राधाकृष्णन-राजन परिवार की साझेदारी से एक अतिरिक्त। मुकुंद राजन और सौम्या राजन का योगदान। चयन प्रक्रिया कठिन रही। आवेदन, साक्षात्कार और फाइनल इंटरव्यू। मनहर ने सभी चरण पास किए। उनकी बौद्धिक क्षमता प्रभावित की। चरित्र और नेतृत्व भी सराहा गया। वैश्विक चुनौतियों पर प्रतिबद्धता दिखाई। Rhodes Trust के सीईओ प्रोफेसर सर रिक ट्रेनर ने बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये छात्र दुनिया बदलेंगे। ऑक्सफोर्ड समुदाय मजबूत बनेगा।
Rhodes Scholarship का महत्व
Rhodes Scholarship दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित है। यह ऑक्सफोर्ड में पूरी तरह वित्त पोषित है। दो-तीन साल की पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई होती है। भारत से हर साल अब छह छात्र जाते हैं। मनहर बंसल इसका उदाहरण हैं। यह स्कॉलरशिप नेतृत्व विकसित करती है। विद्वता और सेवा पर जोर देती है। मनहर जैसे छात्र इसका फायदा उठाएंगे। वे समाज के लिए योगदान देंगे। एनएलएसआईयू बेंगलुरु इस पर गर्व करता है।
संस्थान ने कई Rhodes Scholar दिए। मनहर की सफलता प्रेरणा बनेगी। युवा छात्र मेहनत करेंगे। अंतरविषयी पढ़ाई का महत्व समझेंगे। मनहर ने कहा कि एनएलएसआईयू ने आधार दिया। यहां कानून से आगे सोचा। सामाजिक विज्ञान सीखे। मानविकी पर ध्यान दिया। Rhodes Scholarship से बौद्धिक विकास होगा। वे साहित्य में नई ऊंचाइयां छुएंगे। अनुवाद के क्षेत्र में योगदान देंगे। पंजाब से बेंगलुरु आकर उन्होंने नाम रोशन किया। मुक्तसर का पूरा जिला खुश है। परिवार और शिक्षक गर्व महसूस करते हैं। मीडिया ने खबर को प्रमुखता दी।
इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया ने कवर किया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से बताया। प्रभात खबर ने हिंदी में लिखा। एनएलएसआईयू की वेबसाइट पर बधाई संदेश है। सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट वायरल हैं। ट्विटर पर बधाई संदेश आ रहे। Rhodes Trust की साइट पर प्रोफाइल बनी। मनहर की बायो पढ़ी जा रही। वैश्विक स्तर पर पहचान मिली। भारत का नाम ऊंचा हुआ। ऑक्सफोर्ड में भारतीय झंडा लहराएगा।
अन्य पांच छात्र भी उत्कृष्ट हैं। योगिता, निक्हिता जैसे नाम चर्चा में। लेकिन मनहर की कहानी खास है। कानून छात्र साहित्य चुनेंगे। यह अनोखा संयोजन है। Rhodes Scholarship ऐसे ही विविधता चाहती है। भविष्य में मनहर बड़ा नाम करेंगे। मानवतावादी शिक्षा फैलाएंगे। युवाओं को प्रेरित करेंगे। यह खबर शिक्षा जगत के लिए सकारात्मक है। छात्र अब बड़े सपने देखेंगे।