केरल सरकार ने 2017 के सनसनीखेज अभिनेत्री अपहरण और बलात्कार मामले में अभिनेता दिलीप को बरी करने वाले सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का फैसला लिया है। कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि पीड़िता को पूर्ण न्याय नहीं मिला है और सरकार पीड़िता के साथ खड़ी है। यह फैसला एर्नाकुलम जिला प्रिंसिपल सत्र न्यायाधीश हनी एम. वर्गीज द्वारा सोमवार को सुनाया गया था, जिसमें दिलीप को साजिश रचने के आरोप से मुक्त कर दिया गया।
यह मामला 17 फरवरी 2017 को कोच्चि में हुआ, जब एक प्रमुख मलयालम अभिनेत्री को उसके ही वाहन में अपहरण कर लिया गया और लगभग दो घंटे तक यौन उत्पीड़न किया गया। मुख्य आरोपी सुनील एन.एस. उर्फ पल्सर सुनी और उसके साथी मार्टिन एंटनी, मणिकंदन, विजीश वी.पी., सलीम एच. और प्रदीप को अपराधी ठहराया गया। दिलीप को आठवां आरोपी बनाया गया था, जिस पर साजिश रचकर गैंग को अपराध कराने का आरोप था।
अभिनेत्री मलयालम, तमिल और तेलुगु फिल्मों में काम करती थीं, और इस घटना ने केरल समाज को हिला दिया। पुलिस ने अप्रैल 2017 में पहली चार्जशीट दाखिल की, जबकि जुलाई में दिलीप की गिरफ्तारी हुई जब जेल से सुनी ने उसे पत्र भेजा। दिलीप को अक्टूबर 2017 में जमानत मिली, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई चली।
मुकदमे में 261 गवाहों की जांच हुई, जिनमें कई फिल्म उद्योग के लोग थे जो दुश्मन हो गए। अदालत ने 834 दस्तावेज स्वीकार किए। दो प्रमुख गवाह, पूर्व विधायक पी.टी. थॉमस और निर्देशक बालचंद्र कुमार, मुकदमे के दौरान मर गए।
अदालत का फैसला: दिलीप बरी, अन्य दोषी
एर्नाकुलम प्रिंसिपल सत्र अदालत ने दिलीप को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और सबूत नष्ट करने के आरोपों से बरी कर दिया। न्यायाधीश हनी एम. वर्गीज ने कहा कि अभियोजन पक्ष दिलीप की साजिश साबित करने में असफल रहा। दिलीप ने फैसले के बाद समर्थकों का धन्यवाद दिया और इसे पूर्व पत्नी मंजू वारियर की साजिश बताया।

हालांकि, पहले छह आरोपी पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी (ए2), मणिकंदन (ए3), विजीश वी.पी. (ए4), सलीम एच. (ए5) और प्रदीप (ए6) को दोषी पाया गया। उन्हें आईपीसी की धारा 120बी, 354 (महिला की लज्जा भंग करने के लिए बल प्रयोग), 366 (अपहरण), 354बी (महिला को निर्वस्त्र करने का प्रयास) और 376डी (गैंग रेप) के तहत सजायाफ्त किया गया। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ई और 67ए के तहत वीडियो रिकॉर्डिंग का भी अपराध सिद्ध हुआ।
तीन अन्य आरोपी चार्ली थॉमस, सनिल कुमार उर्फ मेथरी सनिल और शरत को भी बरी कर दिया गया। सजा का फैसला 12 दिसंबर को सुनाया जाएगा। मुकदमा नवंबर 2025 तक चला, जिसमें भारी सुरक्षा व्यवस्था रही।
राज्य सरकार की अपील: पीड़िता के समर्थन में कदम
कानून मंत्री पी. राजीव ने फेसबुक पर घोषणा की कि उन्होंने मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन से चर्चा की और अभियोजन को अपील की तैयारी करने निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “सरकार पीड़िता के साथ है और उच्च अदालत में अपील करेंगे।” विमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) और अन्य संगठनों ने फैसले की निंदा की और पीड़िता के समर्थन में सोशल मीडिया पर अभियान चलाया।
मंत्री राजीव ने पांच खंडों वाली बहस नोट का जिक्र किया जो अभियोजन ने पेश की। सीपीआई(एम) नेता एम.वी. गोविंदन ने कहा कि बड़ी साजिश साबित न होने पर भी सरकार पीड़िता के पक्ष में लड़ेगी। केरल सरकार का यह रुख न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने का प्रयास है। अभियोजन ने कहा कि दिलीप ने अपराध कराया, लेकिन अदालत को पर्याप्त सबूत न मिले। अपील में पूरे फैसले की समीक्षा होगी।
दिलीप का पक्ष और फिल्म उद्योग की प्रतिक्रिया
दिलीप ने नौ साल की लड़ाई के बाद राहत मिलने पर कहा कि यह न्याय की जीत है। उनकी वर्तमान पत्नी काव्या माधवन ने घर लौटने पर गले लगाया। दिलीप ने आरोप लगाया कि मामला राजनीतिक साजिश था। बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि कानून का राज चलेगा।
मलयालम फिल्म उद्योग में यह मामला #मीटू का हिस्सा बना, जिसने महिलाओं की सुरक्षा पर बहस छेड़ी। डब्ल्यूसीसी ने पीड़िता के समर्थन में बयान जारी किया। दिलीप के समर्थक सड़कों पर उतरे, जबकि विरोधी फैसले से नाराज।
2021 में निर्देशक बालचंद्र कुमार के आरोप पर आगे जांच हुई। 2022 में मेमोरी कार्ड के अवैध उपयोग पर हाईकोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए। दिलीप की जमानत याचिका कई बार खारिज हुई।
कानूनी जटिलताएं और आगे की राह
मुकदमे में गवाहों के दुश्मन होने से अभियोजन कमजोर पड़ा। जांच अधिकारी 109 दिनों तक गवाही दी। दिलीप पर सबूत नष्ट करने का अतिरिक्त आरोप था। अपील हाईकोर्ट में होगी, जहां नया साक्ष्य पेश हो सकता है।
केरल हाईकोर्ट ने पहले ही यौन सामग्री के सबूत संभालने के नियम बनाए। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की लंबी प्रक्रिया को उजागर करता है। पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई।
सरकार की अपील से मामला लंबा खिंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। यह महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्याय की मिसाल बनेगा।
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