19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में हुए जुबिन गर्ग डेथ के रहस्य ने देश-विदेश में सनसनी मचा दी है। असम के लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग की इस रहस्यमय मौत की गुत्थी अब सुरक्षा अधिकारियों की गिरफ्तारी से और जटिल हो गई है। इस मामले में अब तक सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच लगातार आगे बढ़ रही है। गुवाहाटी से 10 अक्टूबर को मिली जानकारी के अनुसार जुबिन गर्ग के लंबे वक्त से नियुक्त दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर 1.1 करोड़ रुपए से ज्यादा के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का आरोप है जो इस केस में नए सवाल खड़े करता है।
सुरक्षा अधिकारियों की गिरफ्तारी और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां
जुबिन गर्ग डेथ के मामले में सुरक्षा अधिकारियों की गिरफ्तारी एक बड़ा मोड़ लेकर आई है। जिन पीएसओ पर जुबिन के परिवार और खुद पुलिस का पूरा भरोसा था, अब वे ही जांच के घेरे में हैं। नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य असम पुलिस की विशेष शाखा से जुड़े हैं और कई सालों से गायक की सुरक्षा में तैनात थे। पुलिस को उनके बैंक खातों में बड़े पैमाने पर संदिग्ध लेनदेन मिले हैं, जिनकी गहन जांच चल रही है।
आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल गुप्त रूप से किया गया, जिसे लेकर जांच अधिकारी गंभीर हैं। पीएसओ को पहले निलंबित किया गया था और अब उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया है ताकि जांच में और सहयोग मिल सके।
जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने कहा था कि उन्होंने पीएसओ को सामाजिक कार्यों के लिए कुछ राशि दी थी। लेकिन जांच एजेंसियां इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि लेनदेन का समय और प्रकृति दोनों ही संदिग्ध हैं। यह मामला इस तरह से बढ़ा है कि अब केवल मौत का रहस्य नहीं बल्कि जुबिन के साथ जुड़े लोगों की आर्थिक गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं।
मौत की रहस्यमयी परिस्थितियां और व्यापक जांच
जुबिन गर्ग की मौत 19 सितंबर को सिंगापुर में हुई थी। वे वहां ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में हिस्सा लेने गए थे। 19 सितंबर की शाम को वे एक यॉट पार्टी पर थे जहां तैराकी के दौरान अचानक उनका बेहोश होना और फिर पानी में डूबना हुआ। शुरू में मौत का कारण डूबना बताया गया। पर इसके बाद मौत की कई थ्योरी और विवाद पैदा हुए। सिंगापुर में दो बार पोस्टमार्टम हुआ, जिसमें एक मौत की वजह डूबने को ही बताया, लेकिन दूसरी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। इस बीच गायक के कुछ बैंडमेट ने यह दावा भी किया है कि जुबिन की मौत जहर से हुई हो सकती है।
असम पुलिस की सीआईडी जांच कर रही है कि क्या यह सच में एक आकस्मिक हादसा था या कोई अपराध, साजिश इसमें शामिल है। अब तक इस केस में 7 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं जिनमें जुबिन के चचेरे भाई और असम पुलिस के अधिकारी संदीपन गर्ग, मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, संगीतकार शेखरज्योति गोस्वामी, और गायक अमृतप्रभा महंत शामिल हैं।
इस घटना ने ज्यों-ज्यों तहकीकात को गहराई में जाना, विवाद और सवाल भी बढ़े। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मामले की पूरी जांच का निर्देश दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
विशेषज्ञों और परिवार की प्रतिक्रिया
जुबिन गर्ग के परिवार के सदस्य और करीबी इस मौत की जांच में हर संभव सहयोग कर रहे हैं। गायक की पत्नी ने सुरक्षा अधिकारियों को दिए गए पैसे का जिक्र किया, लेकिन जांच एजेंसियां अभी भी इस विषय में स्पष्ट जवाब चाहती हैं। साथ ही, जुबिन के कई साथी और दोस्त भी इस मामले में खुलासे की उम्मीद में हैं।
सिंगापुर की फॉरेंसिक टीम और असम पुलिस के बीच मिलकर जांच का संचालन हो रहा है। मौत के प्रत्येक पहलू को जांच में रखा गया है। हर नयी जांच रिपोर्ट के साथ मामले के कई नए पहलू सामने आ रहे हैं जिससे जुबिन गर्ग डेथ की कहानी और रहस्यमय बनती जा रही है।
जुबिन गर्ग डेथ की गुत्थी अभी खुलनी बाकी है। निजी सुरक्षा अधिकारियों की गिरफ्तारी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच टीम हर दिशा में जांच कर रही है ताकि मृत्यु के इन रहस्यमय पहलुओं का पर्दाफाश हो सके।
देश के सबसे लोकप्रिय गायक की मौत के पीछे छिपे कारणों का खुलासा जल्द होना जरूरी है ताकि परिवार और फैंस को न्याय मिल सके। जुबिन गर्ग डेथ के मामले में असम पुलिस और सिंगापुर की पुलिस की संयुक्त जांच जारी है और आशा की जा रही है कि जल्द ही इस घटना से जुड़ी सारी अनसुलझी पहेलियां सुलझ जाएंगी।
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