13 अक्टूबर 2025, नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबित भारत-US ट्रेड डील पर चर्चा अब नए सिरे से तेज़ हो रही है। बीते कई महीनों से अटकी चली आ रही यह डील अब फाइनल दौर में पहुंचती दिख रही है। इसी हफ्ते एक वरिष्ठ भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका जाकर इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के अगले चरण की बातचीत करेगा। यह कदम दोनों देशों के व्यावसायिक रिश्तों को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
बातचीत का इतिहास और हाल की प्रगति
इस साल फरवरी से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर पांच दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन मुख्य विवाद टैरिफिंग नीति को लेकर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर 25% टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में 50% तक बढ़ा दिया गया। इसी की वजह से बातचीत रुक गई थी। सितंबर में अमेरिकी वार्ताकार नई दिल्ली आए और फिर इस बार भारतीय टीम अमेरिका जाकर बातचीत को आगे बढ़ाने वाली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बीते सप्ताह की गई बातचीत से यह स्पष्ट संकेत मिले कि दोनों पक्ष इस डील को सकारात्मक रूप से पूरा करना चाहते हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी सितंबर में न्यूयॉर्क दौरे के दौरान अमेरिकी समकक्षों के साथ इस समझौते पर विस्तार से चर्चा की। दोनों ने द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ावा देने के लिए सहमति जताई।
भारत-US ट्रेड डील का मकसद
भारत और अमेरिका इस समझौते के जरिए 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान के 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं। यह लक्ष्य दोनों के आर्थिक हितों को बड़ा नया आयाम देगा। अमेरिका लगातार चौथे वर्ष भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, और उसका भारत से कुल व्यापार 131.84 अरब डॉलर का रिकॉर्ड है। इसमें से भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर का है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18%, जबकि आयात में 6.22% है।
यह डील दोनों देशों के लिए न केवल आर्थिक वृद्धि का रास्ता खोलेगी, बल्कि रोजगार और निवेश के क्षेत्र में भी नए अवसर बढ़ाएगी। इसके साथ ही तकनीक, सेवा क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग को भी बल मिलेगा।
आने वाले दौर की चुनौतियां
अभी भी इस डील में कई बारीकियां और टैरिफ से जुड़े मुद्दे हैं, जिन पर समाधान निकालना अहम है। टैरिफ का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके अलावा व्यापार में पारदर्शिता, दोनों देशों के व्यापार नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल को संतुलित करना भी आवश्यक होगा।
भारत-US दोनों ही पक्ष अपेक्षा कर रहे हैं कि इस सप्ताह की बैठक में इन मुद्दों पर कई सकारात्मक हल निकलेंगे और बड़ी डील तक पहुँचा जा सकेगा। यह डील भारत के लिए आर्थिक बढ़त के साथ-साथ वैश्विक व्यापार में प्रभावशाली स्थिति की परिणति होगी।
भारत-US ट्रेड डील वर्षों से लंबित थी, लेकिन अब दोनों देश इसे पूरा करने के लिए गंभीरता दिखा रहे हैं। इस हफ्ते होने वाली बैठक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच रिश्तों में गर्मजोशी के बीच यह डील व्यापारिक रिश्तों को नई उड़ान देगी। इससे न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक संतुलन को प्रभावित करेगी।
दोनों देश व्यापार को दोगुना करने के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर यह डील सफल होती है, तो यह भारत-वाशिंगटन के व्यावसायिक रिश्तों में एक नई इबारत लिखेगी और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगी।
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