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आयकर रिफंड पर रोक: ‘रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस’ का पूरा राज़ खुला, टैक्सपेयर्स की परेशानी बढ़ी!

आयकर रिफंड पर रोक: 'रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस' का पूरा राज़ खुला, टैक्सपेयर्स की परेशानी बढ़ी!

आयकर रिफंड पर रोक: 'रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस' का पूरा राज़ खुला, टैक्सपेयर्स की परेशानी बढ़ी!

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने असेसमेंट ईयर 2025-26 (AY 2025-26) के लिए लाखों टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल अलर्ट भेजे हैं, जिसमें उनके इनकम टैक्स रिफंड (income tax refund) को होल्ड करने की सूचना दी गई है। यह ‘रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस’ (risk management process) के तहत लिया गया कदम है, जो ITR फाइलिंग में पाई गई डिस्क्रेपेंसीज (discrepancies) की वजह से उठाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (पूर्व ट्विटर) पर टैक्सपेयर्स ने भारी हंगामा मचा रखा है, क्योंकि रिवाइज्ड ITR (revised ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 महज कुछ दिन दूर है। कई यूजर्स ने विभाग की ओर से आने वाले वेज मैसेजेस को तनावपूर्ण बताते हुए डेडलाइन एक्सटेंशन की मांग की है।

यह मुद्दा FY 2024-25 के ITR फाइलर्स के लिए खासतौर पर गंभीर है, क्योंकि ज्यादातर रिफंड ईयर-एंड से पहले ही जारी हो जाते हैं। लेकिन इस बार प्रोसेसिंग डिले (ITR processing delay) और रिस्क फ्लैगिंग ने हालात बिगाड़ दिए हैं। CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल ने नवंबर में स्पष्ट किया था कि गलत डिडक्शन क्लेम्स (wrongful deductions) की जांच चल रही है, जिससे हाई-वैल्यू रिफंड्स दिसंबर तक रिलीज हो सकते हैं। इस आर्टिकल में हम डिटेल में समझेंगे कि रिफंड क्यों होल्ड हो रहा है, टैक्सपेयर्स क्या करें, और आगे की स्ट्रेटजी क्या हो।

रिफंड होल्ड की मुख्य वजहें: फॉर्म 26AS और ITR में मिसमैच

इनकम टैक्स रिफंड पर रोक लगने का सबसे बड़ा कारण ITR और फॉर्म 26AS या AIS (Annual Information Statement) के बीच मिसमैच है। उदाहरण के लिए, अगर एम्प्लॉयर ने फॉर्म 16 में कोई डिडक्शन (जैसे सेक्शन 80C के तहत PPF या ELSS इन्वेस्टमेंट) रिपोर्ट नहीं किया, लेकिन टैक्सपेयर ने ITR में क्लेम किया, तो सिस्टम इसे रिस्क के तहत फ्लैग कर देता है। इसी तरह, TDS अमाउंट में अंतर, फॉरेन इनकम की गलत रिपोर्टिंग, कैपिटल गेन्स पर गलत कैलकुलेशन, या हाई-वैल्यू डोनेशन क्लेम्स भी ट्रिगर पॉइंट्स हैं।

रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) आयकर विभाग का ऑटोमेटेड टूल है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स पर आधारित है। यह बड़े डेटाबेस से मैचिंग करता है – जैसे EPFO, बैंक स्टेटमेंट्स, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री, और थर्ड-पार्टी सोर्सेस। अगर रिफंड क्लेम 20% से ज्यादा मिसमैच दिखाता है, तो प्रोसेसिंग होल्ड हो जाती है। AY 2025-26 में 7.57 करोड़ ITR फाइल हुए, जिनमें से 10-15% केसेज रिस्क में फंस गए हैं, खासकर सैलरीड क्लास और फ्रीलांसर्स में।

कई केसेज में जेनुइन क्लेम्स भी फंस रहे हैं। मिसाल के तौर पर, अगर एम्प्लॉई ने एम्प्लॉयर को डिडक्शन डिटेल्स नहीं दीं (क्योंकि कई कंपनियां सिर्फ बेसिक सैलरी पर TDS काटती हैं), लेकिन ITR में घर खरीदने पर होम लोन प्रिंसिपल या मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम किया, तो मिसमैच हो जाता है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने X पर शेयर किया, “क्या इसका मतलब टैक्स ईवेजर है? यह सिस्टम को और स्मार्ट बनाने की जरूरत है।” CBDT के मुताबिक, लो-वैल्यू रिफंड (<₹50,000) पहले जारी हो रहे हैं, लेकिन हाई-वैल्यू वाले स्क्रूटनी के बाद।

इसके अलावा, प्री-फिल्ड ITR डेटा पर भरोसा न करना बड़ी गलती है। आयकर पोर्टल पर उपलब्ध डेटा हमेशा 100% एक्यूरेट नहीं होता, क्योंकि थर्ड-पार्टी रिपोर्टिंग में देरी होती है। टैक्सपेयर्स को हमेशा मैन्युअल वैलिडेशन करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर टैक्सपेयर्स का गुस्सा: ‘वेज मैसेजेस’ से तनाव

सोशल मीडिया पर #ITRRefundHold और #TaxRefundDelay जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक टैक्सपेयर ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “आयकर विभाग का मैसेज: ‘Your ITR refund is on hold’। अगर भरोसा नहीं, तो मैसेज में ही कह दो कि इग्नोर करो, रिफंड नहीं अटकेगा। बहुत स्ट्रेसफुल!” दूसरे यूजर ने कहा, “CA हूं, जेनुइन क्लेम्स पर भी होल्ड। एम्प्लॉयर को ब्लेम करें या खुद को?”

X पर दर्जनों पोस्ट्स में शिकायत है कि प्रोसेसिंग में महीनों की देरी के बाद सिर्फ 1 हफ्ते का नोटिस दिया जा रहा। “रिवाइज्ड ITR डेडलाइन एक्सटेंड करो, क्योंकि ITR प्रोसेसिंग डिले की वजह से ही समस्या हुई,” एक यूजर ने डिमांड की। यह खासकर उन फैमिलीज के लिए परेशान करने वाला है जो क्रिसमस-न्यू ईयर पर रिफंड से शॉपिंग या बिल पेमेंट प्लान कर रहे थे। नॉर्मली, ई-वेरिफाइड ITR के 4-5 हफ्तों में रिफंड आ जाता है, लेकिन इस बार RMS ने चेन रिएक्शन क्रिएट कर दिया।

रेडिट और अन्य फोरम्स पर भी डिस्कशन चल रहे हैं, जहां यूजर्स शेयर कर रहे हैं कि छोटे-छोटे मिसमैच जैसे गलत PAN एंट्री या बैंक IFSC में एरर भी होल्ड का कारण बन रहे हैं। एक थ्रेड में 500+ कमेंट्स हैं, जहां लोग सलाह दे रहे हैं कि घबराएं नहीं, बल्कि कंप्लायंस पोर्टल चेक करें। यह ट्रेंड दिखाता है कि डिजिटल इंडिया के दौर में कम्युनिकेशन गैप अभी भी एक समस्या है – SMS वेज हैं, लेकिन डिटेल्ड ईमेल या पोर्टल नोटिफिकेशन क्यों नहीं?

रिफंड स्टेटस चेक और सुधार के स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

सबसे पहले, रिफंड स्टेटस चेक करें। इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें, ‘e-File > Income Tax Returns > View Filed Returns’ पर जाएं, या ‘Refund Status’ सेक्शन में PAN, AY 2025-26 और कैप्चा डालें। NSDL साइट (tin.tin.nsdl.com) पर भी ट्रैक कर सकते हैं। अगर स्टेटस ‘Refund on Hold’ या ‘RMS Flagged’ दिखे, तो एक्शन लें।

समाधान के स्टेप्स:

  1. AIS और 26AS डाउनलोड करें: पोर्टल पर ‘Services > Annual Information Statement’ से चेक करें। TDS, इनकम सोर्सेज मैच करें।
  2. मिसमैच आइडेंटिफाई करें: ITR vs फॉर्म 16/26AS में अंतर नोट करें – जैसे एक्स्ट्रा 80D क्लेम या फॉरेन ट्रैवल एक्सपेंस।
  3. रिवाइज्ड ITR फाइल करें: 31 दिसंबर 2025 से पहले सेक्शन 139(5) के तहत फाइल करें। कोई पेनल्टी नहीं लगती, लेकिन डिले से इंटरेस्ट स्टॉप हो सकता है।
  4. फीडबैक सबमिट करें: ‘Compliance Portal’ में RMS अलर्ट पर रिस्पॉन्स दें, डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें।
  5. इग्नोर ऑप्शन: अगर सब सही है, तो वेट करें – ऑटो प्रोसेसिंग रिज्यूम हो जाएगी।

बेलेटेड रिटर्न 31 मार्च 2026 तक फाइल हो सकता है, लेकिन लेट फीस (₹5,000 तक) और इंटरेस्ट लगेगा। बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड हो, वरना रिफंड रिजेक्ट हो सकता है। अगर रिफंड >₹50,000 और 60 दिनों से ज्यादा डिले, तो 0.5% मंथली इंटरेस्ट मिलेगा (सेक्शन 244A)।

CBDT की अपडेट्स और भविष्य की सलाह: दिसंबर तक रिफंड की उम्मीद

CBDT ने नवंबर में प्रेस रिलीज में कहा कि 90% रिफंड जारी हो चुके हैं, बाकी दिसंबर 2025 तक क्लियर हो जाएंगे। चेयरमैन रवि अग्रवाल ने हाई-वैल्यू रिफंड्स (₹10 लाख+) पर फोकस बताया, जहां फेक क्लेम्स की जांच AI से हो रही है। ITR-1 से ITR-4 तक सभी फॉर्म्स प्रभावित हैं, लेकिन बिजनेस इनकम वालों को ज्यादा चेक।

भविष्य के लिए टिप्स:

टैक्सपेयर्स को घबराहट छोड़ समय रहते एक्शन लेना चाहिए। यह सिस्टम टैक्स ईवेजन रोकने के लिए है, न कि सभी को परेशान करने के लिए। अगर सुधार कर लिया, तो रिफंड नॉर्मल प्रोसेस में आ जाएगा। सरकार की डिजिटल पहल से ट्रांसपेरेंसी बढ़ी है, लेकिन अवेयरनेस जरूरी है।

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