Breaking News Near Me

घने कोहरे में मौत का एक्सप्रेसवे! यमुना एक्सप्रेसवे पर बसों की श्रृंखलाबद्ध टक्कर, चीख-पुकार से दहला मथुरा

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के घने कोहरे के बीच भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें कई वाहन आपस में टकरा गए। बलदेव थाना क्षेत्र के माइलस्टोन 127 के पास सात बसों और तीन अन्य वाहनों की श्रृंखलाबद्ध टक्कर हुई, जिसके चलते मौके पर अफरातफरी मच गई। घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी, जिसके चलते पीछे से आ रहे वाहन पहले से दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों को नहीं देख पाए और एक के बाद एक टकराते चले गए।

हादसा तड़के करीब 4:30 बजे के आसपास हुआ, जब ज्यादातर यात्री बसों में सो रहे थे और अचानक जोरदार झटके और चीख-पुकार से उनकी नींद टूटी। टक्कर के बाद कुछ बसों और कारों में आग लग गई, जिससे हालात और ज्यादा भयावह हो गए और कई यात्री बसों में फंस गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कम से कम चार लोगों की मौत हुई, जबकि 25 से अधिक यात्री घायल हुए हैं, हालांकि बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या में वृद्धि की आशंका जताई गई।​​

मौत का मंजर: बसों में आग, यात्रियों की चीखें

घने कोहरे में मौत का एक्सप्रेसवे! यमुना एक्सप्रेसवे पर बसों की श्रृंखलाबद्ध टक्कर, चीख-पुकार से दहला मथुरा

हादसे के बाद दृश्य इतना दर्दनाक था कि प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे “कंपा देने वाला मंजर” बताया। टक्कर के बाद लगी आग ने देखते ही देखते कई बसों को अपनी चपेट में ले लिया और लपटें इतनी तेज थीं कि कई वाहन जलकर खाक हो गए। कई यात्रियों ने बताया कि वे गहरी नींद में थे, अचानक जोरदार धमाके की आवाज आई, बस हिली और फिर चारों तरफ से चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

कुछ बसों में आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्री बाहर निकल भी नहीं पाए और बसों के भीतर ही फंस गए। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर सबसे पहले मौके पर पहुंचे और जिन्होंने जैसे बन पड़ा, खिड़कियां तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धुएं और कोहरे के बीच जलते वाहनों के पास पहुंचना भी मुश्किल था, लेकिन फिर भी लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घायलों की मदद की।

घायलों का इलाज और राहत-बचाव अभियान

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद जलती बसों की आग पर काबू पाया और क्रेन की मदद से सड़क पर खड़ी क्षतिग्रस्त बसों और कारों को हटाया गया, ताकि यातायात बहाल किया जा सके। घायलों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई गई।​

प्रशासन की ओर से बताया गया कि हादसे में घायल यात्रियों की पहचान कर उनके परिजनों को सूचित किया जा रहा है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, ताकि लोग अपने परिजनों की जानकारी हासिल कर सकें। कई यात्रियों के परिजन फोन और सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रियजनों का हाल जानने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए अतिरिक्त डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन ने दावा किया कि सभी घायलों को समय पर चिकित्सीय सहायता दी जा रही है और किसी को भी गंभीर अवस्था में बिना इलाज के नहीं छोड़ा गया।

कोहरा बना खौफ: हादसे की वजह और चेतावनियां

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी, जिसकी वजह से यह बड़ा हादसा हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के समय दृश्यता “एक मीटर से भी कम” थी, ऐसे में पहले से खड़ी या धीमी गति से चल रही बसों और कारों को पीछे से आने वाले वाहन चालक देख ही नहीं पाए। एक बस के आगे अचानक ब्रेक लगाने या हल्की टक्कर के बाद पीछे से आ रही बसें और कारें लगातार आपस में भिड़ती चली गईं, जिससे यह सिलसिला कई गाड़ियों तक जा पहुंचा।​​

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मौसम में हाईवे पर तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और पर्याप्त दूरी न रखना, हादसों की बड़ी वजह बनते हैं। यमुना एक्सप्रेसवे पहले भी कोहरे के दौरान कई बड़े हादसों का गवाह रह चुका है और हर साल सर्दियों में यहां दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि कोहरे के दिनों में वाहनों की गति सीमा और सख्ती से लागू की जाए, फॉग लाइट्स का अनिवार्य उपयोग हो और ड्राइवरों को बार-बार अलर्ट संदेश भेजे जाएं।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस भीषण हादसे पर दुख प्रकट किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जाहिर की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए और राहत-बचाव कार्य में कोई लापरवाही न हो। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और टोल संचालक कंपनियों से भी इस हादसे के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि सुरक्षा मानकों में और सुधार किया जा सके। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि कोहरे के मौसम में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी, ड्राइवरों को सतर्क करने के लिए अतिरिक्त डिस्प्ले बोर्ड और अलर्ट सिस्टम लगाए जाएंगे और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस बीच, हादसे ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा और कोहरे के दौरान ड्राइविंग नियमों पर गंभीर बहस छेड़ दी है, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है।

Read More: पृथ्वी शॉ का धमाकेदार सोशल मीडिया यू-टर्न: IPL 2026 नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने 75 लाख में खरीदा!

Exit mobile version