दिल्ली 13 नवंबर 2025। दिल्ली पुलिस ने बताया कि DNA जांच से यह साबित हो गया है कि लाल किले के बाहर हुए धमाके के पीछे डॉ. उमर उन नबी ही थे। धमाका एक सफेद हुंडई i20 कार में सोमवार शाम हुआ था। इस कार के स्टीयरिंग और एक्सेलेटर के बीच फंसा एक पैर मिला था, जिसकी DNA जांच के बाद पुष्टि हुई कि वह उनसे संबंधित है।
DNA जांच से हुआ खुलासा
DNA परीक्षण के जरिए यह पता चला कि धमाका करने वाला व्यक्ति डॉ. उमर उन नबी ही था। पुलिस ने कार के बीच फंसे पैर से DNA सैंपल लेकर जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) भेजा था। उनकी मां के DNA सैंपल भी पुलवामा से लेकर दिल्ली लाए गए थे। DNA मैचिंग एक अहम सबूत साबित हुआ है, जो नबी की सीधे भूमिका को धमाके से जोड़ता है। इससे यह साबित होता है कि यह एक खतरनाक आतंकवादी हमला था।
डॉ. उमर उन नबी हरियाणा के फरीदाबाद में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। पुलिस ने बताया कि वे डॉ. मुजम्मिल शकील गनाइ और डॉ. अकील रदर से जुड़े थे, जिन्हें जम्मू-कश्मीर में गिरफ़्तार किया गया था। यह तीनों फरीदाबाद में बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट, डिटोनेटर, टाइमर और हथियार स्टोर कर रहे थे।

जांच में सामने आईं और जानकारियां
पुलिस के अनुसार, उमर ने धमाके से 11 दिन पहले ही हुंडई i20 कार खरीदी थी। वह कार बेचने वाले और उनके साथी अमीर राशिद के साथ भी देखे गए थे। 30 अक्टूबर को गनाइ की गिरफ़्तारी के बाद उमर ने छुपना शुरू कर दिया। बड़ी विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद उन्होंने दिल्ली भागकर धमाका किया।
सीसीटीवी फुटेज में उमर को कई जगहों पर घूमते देखा गया। वे बदरपुर बॉर्डर, कनॉट प्लेस, टर्कमैन गेट, सुनहरी मस्जिद के आस-पास और अंततः लाल किले पहुंचते नजर आए। पुलिस ने कहा कि धमाके में कार में वे अकेले थे। अभी तक 10 में से 8 शवों की पहचान हो पाई है, जबकि दो सिर्फ शरीर के टुकड़े मिले हैं। नबी की मां और दो भाइयों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में ले जाया गया है और उनका DNA भी जाँचा जा रहा है।
पुलिस को उमर की दूसरी कार भी मिली, जो फरीदाबाद में रेड इकोस्पोर्ट थी। जांच में पता चला कि उस कार का इस्तेमाल अमोनियम नाइट्रेट ले जाने के लिए किया गया था। उमर को गनाइ की मदद करने का भी संदेह है, क्योंकि वे विस्फोटक सामग्री को अपनी किराए की जगह पर छुपाते थे।
यह DNA जांच विस्फोट की गंभीरता को प्रमाणित करने वाला अहम सबूत है, जिसने धमाके के पीछे असली शख्सियत को उजागर किया है। पुलिस अब भी मामले की विस्तार से छानबीन कर रही है और आतंकवादी साजिश को नाकाम करने का प्रयास जारी है।
यह घटना दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी गंभीर चेतावनी है। जांच में DNA की भूमिका ने आतंकवाद के मामलों में फोरेंसिक विज्ञान की अहम जरूरत को भी साबित किया है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और सभी सामने आए तथ्यों को पूरी तह तक जाँचेंगे।
इस प्रकार, DNA के माध्यम से मिली जानकारी ने इस खतरनाक घटना के रहस्य को सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह पुष्टि कराती है कि डॉ. उमर उन नबी ही लाल किले धमाके के पीछे था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की जांच और कार्रवाई तेज हो सकेगी।