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आरएसएस की तारीफ पर कांग्रेस दो फाड़: दिग्विजय सिंह को पवन खेड़ा-सुप्रिया का विरोध, टीएस सिंह देव ने किया बचाव

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के आरएसएस की संगठनात्मक ताकत की तारीफ वाले बयान ने न सिर्फ भीतरखाने बहस तेज कर दी, बल्कि कांग्रेस की वैचारिक एकता और रणनीतिक दिशा पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विवाद दिखाता है कि कांग्रेस के भीतर आरएसएस‑बीजेपी मॉडल को लेकर प्रशंसा, आलोचना और ‘सीखने’ की बहस एक साथ चल रही है।

दिग्विजय सिंह का बयान: संगठन की ताकत, विचारधारा से असहमति

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेतृत्व की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए आरएसएस‑बीजेपी के संगठनात्मक मॉडल की खुलकर तारीफ की। उन्होंने लिखा कि किस तरह ज़मीनी स्तर का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर काम करते‑करते मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक बन सकता है, यह संगठन की शक्ति का उदाहरण है।

बवाल बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने सफाई दी कि उनकी पोस्ट को गलत समझा गया और उनका इरादा कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सुधार पर ध्यान दिलाना था, न कि आरएसएस‑बीजेपी की राजनीति को वैध ठहराना।

पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत का कड़ा विरोध

दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस के आधिकारिक चेहरे माने जाने वाले पवन खेड़ा और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बेहद सख्त रुख अपनाया। दोनों नेताओं ने साफ कहा कि कांग्रेस को आरएसएस से कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।​​

आरएसएस की तारीफ पर कांग्रेस दो फाड़: दिग्विजय सिंह को पवन खेड़ा-सुप्रिया का विरोध, टीएस सिंह देव ने किया बचाव

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी दिग्विजय सिंह के बयान को तोड़‑मरोड़कर पेश कर रही है, ताकि पार्टी के भीतर फूट दिखा कर राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।

टीएस सिंह देव और अन्य नेताओं का समर्थन

जहां एक ओर खेड़ा और श्रीनेत जैसे नेता आरएसएस को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं, वहीं टीएस सिंह देव जैसे वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। टीएस सिंह देव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि विचारधारा और संगठनात्मक कार्यशैली को अलग‑अलग करके देखना चाहिए।

सलमान खुर्शीद जैसे कुछ अन्य नेताओं ने भी दिग्विजय सिंह को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति वफादार और पार्टी हित में सोचने वाला नेता बताते हुए कहा कि किसी विरोधी संगठन की ताकत का तथ्यात्मक मूल्यांकन करना और उसकी वैचारिक प्रशंसा करना, दोनों अलग बातें हैं।

विवाद के राजनीतिक मायने और कांग्रेस की असमंजस

दिग्विजय सिंह का बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार चुनावी हारों के बाद आत्ममंथन की प्रक्रिया से गुजर रही है और बीजेपी‑आरएसएस के कैडर‑आधारित मॉडल को एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रही है। यही वजह है कि संगठनात्मक सुधार और कैडर निर्माण की बहस पार्टी के भीतर बार‑बार उभर रही है।​

इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की वैचारिक एकजुटता, आंतरिक अनुशासन और सार्वजनिक संदेश‑प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी को तय करना होगा कि आलोचनात्मक अध्ययन और वैचारिक समझौते की रेखा कहां खींची जाए, ताकि संगठन सुधार की बहस, राजनीतिक भ्रम में न बदल जाए।

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