पटना, 17 अक्टूबर 2025। बिहार चुनाव 2025 विधानसभा के पहले चरण के नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन बिहार में राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। तेजस्वी यादव के समर्थकों ने पप्पू यादव के खिलाफ जमकर विरोध जताया। राजद प्रत्याशी पप्पू यादव को तेजस्वी यादव के करीबी समर्थकों ने सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर विरोधी बयान देने के लिए खेदाते हुए चुनावी मुकाबले में खटास बढ़ा दी है। बिहार चुनाव 2025 इस प्रकार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद ने माहौल तनावपूर्ण कर दिया है।
तेजस्वी यादव के समर्थकों ने पप्पू यादव के बयान को महागठबंधन के एकता के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान महागठबंधन के लिए नुकसानदायक हैं और सभी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए। बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन के अंतिम दिन तक दलों ने आधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवारों के नामांकन कर दिये हैं, लेकिन महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। इससे राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बन रहा है।
चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक अस्थिरता और मुख्य मुद्दे
पहले चरण में कुल 121 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। महागठबंधन के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने भी सभी उम्मीदवारों की सूची पूरी कर ली है और चुनाव प्रारंभ होने के लिए तैयार है। तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा माना जा रहा है, हालांकि आलेख तक इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। महागठबंधन के भीतर कांग्रेस और राजद के मध्य सीटों के बंटवारे पर अंतिम दौर की बातचीत जारी है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बिहार चुनाव 2025 में सीट बंटवारे की अनिश्चितता और महागठबंधन के भीतर चल रही खींचतान विपक्ष की चुनावी तैयारियों को कमजोर कर सकती है। वहीं सत्ताधारी NDA अपने उम्मीदवारों के साथ जोरदार प्रचार-प्रसार में जुटी हुई है। भाजपा के कई शीर्ष नेता बिहार में चुनावी रैलियां कर रहे हैं और युवा वर्ग को खास तौर पर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव 2025 के दौरान चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष उपाय किए हैं। नकदी, शराब और अन्य अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के मकसद से सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ा दिया गया है। चुनाव आयोग का मानना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
बिहार चुनाव 2025 सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए भी निर्णायक साबित होगा। बेरोजगारी, विकास कार्य, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुख्य मुद्दे इस बार चुनावी बहस का केंद्र बने हैं। जनता इस बार अपनी अपेक्षाएं और उम्मीदें लेकर मतदान करने जा रही है।
संक्षेप में कहा जाए तो बिहार चुनाव 2025 की रणभूमि में राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। तेजस्वी यादव समर्थकों और पप्पू यादव के बीच खुला विरोधाभास राजनीतिक समर को और रोचक बना रहा है। महागठबंधन के भीतर सहमति बनाने की चुनौती चुनाव परिणामों को सीधे प्रभावित कर सकती है। जनता की नजर आगामी चुनावी चरणों पर टिकी है, जो बिहार के भविष्य का निर्धारण करेंगे।
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