7 नवंबर 2025, पटना। बिहार वोटिंग ने फिर एक बार इतिहास रच दिया है। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में वोटर टर्नआउट 64.66 प्रतिशत दर्ज हुआ, जो पिछले 75 सालों में सबसे अधिक है। इससे पहले 1998 और 2000 में भी 64 प्रतिशत वोटिंग का रिकॉर्ड था लेकिन इस बार उसे पार कर दिया गया। बिहार के लगभग 3.75 करोड़ मतदाताओं ने प्रचुर मात्रा में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस मतदान उत्साह ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है और चुनाव आयोग के लिए भी यह एक रिकार्ड ब्रेकिंग पल साबित हुआ है।
बिहार वोटिंग रिकॉर्ड कैसे टूटा
बिहार वोटिंग में इस बार असाधारण बढ़ोतरी के कई कारण रहे। पहली प्रमुख वजह है एसआईआर प्रक्रिया (Systematic Voters’ List Revision) जिसने मतदाताओं को यह सुनिश्चित करने का मौका दिया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से निकला न हो। इससे नाम कटने के डर से जिन लोगों ने मतदान न किया था, वे इस बार अधिक जागरूक होकर वोटिंग बूथ पहुंचे। इसके साथ-साथ छठ पूजा के बाद चुनाव होने की वजह से भी उत्साह बढ़ा, क्योंकि लोग त्योहारी अवसरों के बाद मतदान में भाग लेने के लिए प्रेरित हुए।

महिलाओं की भागीदारी इस बार बहुत बड़ी रही। चुनाव प्रक्रिया को पहले की तुलना में आसान और सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हुई, जिससे लोग आसानी से मतदान केंद्रों तक पहुंच पाए। बिहार के कई जिलों जैसे मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, मधेपुरा, वैशाली, सहरसा आदि में 65 से 70 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई।
पहले चरण की महत्वपूर्ण घटनाएं और मतदान पैटर्न
पहले चरण में कुल 121 निर्वाचन क्षेत्रों में बिहार वोटिंग हुई। मुजफ्फरपुर में 70.96% और समस्तीपुर में 70.63% मतदान हुआ। मधेपुरा में 67.21%, वैशाली में 67.37%, सहरसा में 66.84%, खगड़िया में 66.36%, लखीसराय में 65.05%, मुंगेर में 60.40%, सीवान में 60.31%, नालंदा में 58.91% और पटना में 57% मतदान दर्ज हुआ। कुछ जगहों पर हिंसात्मक घटनाएं भी हुईं जैसे पत्थरबाजी और पुलिस के साथ झड़प, बूथ कैप्चरिंग की खबरें, और EVM खराबी जैसी समस्या भी सामने आईं। लेकिन फिर भी जनता ने बड़े उत्साह और जिम्मेदारी से मतदान किया।

बिहार वोटिंग के इस रिकॉर्ड से लोकतंत्र की मजबूती और मतदाता जागरूकता की पुष्टि होती है। चुनाव आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश कुमार ने इस ऐतिहासिक मतदान की सराहना करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। राजनीतिक दलों के लिए भी यह संदेश है कि जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और बदलाव की राह पर है।
बिहार वोटिंग ने पिछले सभी चुनावों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। इसके प्रभाव दूरगामी होंगे और आने वाले चुनावों की दिशा तय करेंगे। यह चुनावी उत्साह बिहार के लोकतंत्र की जीवंतता और जनता की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक है।
इस प्रकार, बिहार वोटिंग ने न केवल 75 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है, बल्कि लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाया है। आगामी चरणों में भी अपेक्षा है कि ये उत्साह और भागीदारी जारी रहेगी। बिहारवासियों ने साबित कर दिया है कि जब सही अवसर और सुविधा दी जाती है, तो वे लोकतंत्र को मजबूती से आगे बढ़ाते हैं।
Read More: GTA 6 रिलीज़ फिर से टली नवंबर 2026 में गेमफैन रहेंगे इंतजार में